शिक्षा के पावन मंदिर में यह कैसा खून-खराबा

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सुनील कुमार माथुर



आज समूचा विश्व सुख – शांति और समृध्दि की बात कर रहा हैं वहीं दूसरी ओर श्रीनगर में कुछ शरारती तत्वों ने एक स्कूल के भीतर दो शिक्षकों की गोली मार कर हत्या कर दी । शिक्षा के पावन मंदिर में खून खराबे की घटना ने यह साबित कर दिया कि आज कि पीढी में संस्कारों का नितान्त अभाव नजर आ रहा है । आज की शिक्षा मात्र बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही देती हैं कोई व्यवहारिक ज्ञान और आदर्श संस्कार नहीं देती हैं और न ही आज अभिभावकों के पास समय हैं कि वे अपने-अपने बच्चों को आदर्श संस्कार दे । वे मात्र पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण कर रहें है और क्लबों की संस्कृति को अपना रहें है ।

आदर्श संस्कार कोई किराणे की सामग्री नहीं है कि जब जरूरत पडी तब हम पैसा देकर बाजार से खरीद ले । जब से संयुक्त परिवार टूटने लगें और एकल परिवार बनने लगे तब से संस्कारों का बच्चों में अभाव नजर आने लगा हैं । चूंकि माता – पिता स्वयं पाश्चात्य संस्कृति में रंगे हैं । क्लबों में जाते हैं । भारतीय भोजन और सभ्यता और संस्कृति व नैतिक मूल्यों का तभी से हास होने लगा हैं ।

अपराधी लोग कोई जन्म से अपराधी नहीं होता हैं अपितु ऐसे लोग सही समय पर सही मार्गदर्शन नहीं मिलने से राष्ट्र की मुख्यधारा से कट जाते हैं और धन – दौलत व नाना प्रकार की सुख सुविधाओं के लालच में अपराधी बन जातें है । यह तनिक सुख सुविधाएं और धन – दौलत उनका भविष्य बर्बाद कर रहीं है । अतः अभिभावकों व शिक्षकों का दायित्व बनता है कि वे बच्चों को आदर्श संस्कार दे ।

हमारी लापहरवाही ही अपराधियों को पनपने का मौका देती हैं । याद रखिये कि जिस घर – परिवार में आज भी बुजुर्गों का मान – सम्मान होता हैं वहां किसनी शांति और समृध्दि नजर आती हैं । शिक्षा के पावन मंदिर में खून – खराबा होना शिक्षा जगत के गाल पर करारा तमाचा है । आज की शिक्षा पद्धति किस ओर जा रही हैं । यह सोचने का समय किसी के पास नहीं है । यह कैसी विडम्बना है ।



शिक्षा संस्कारों की जननी है और शिक्षा प्राप्त कर लेना ही काफी नहीं है अपितु क्या सही हैं और क्या गलत हो रहा हैं । हमें इसका फर्क भी समझना होगा । कोई भी व्यक्ति मां के पेट से अपराधी बनकर नहीं निकलता हैं । सभी समान होते हैं लेकिन आदर्श संस्कारों का अभाव , किसी सही व्यक्ति पर बिना किसी कारण अत्याचार होना , किसी को बिना वजह परेशान करना , समान काम का समान वेतन न मिलना , आर्थिक असमानता , सरकार व प्रशासन की दौहरी नीतियां आदि – आदि अनेक कारण हैं जो युवा पीढी को गलत राह की ओर ले जा रहें है ।

हमें अपराधी से नफरत नहीं करनी हैं अपितु अपराध क्यों हुआ उसकी तह में जाकर कारणों का ही खात्मा करना होगा अपराधी को तो सही मार्गदर्शन देकर व सुधरने का अवसर देकर सही मार्ग पर लाया जा सकता हैं । अतः अपराधियों की धर पकड में आमजन भी सरकार व प्रशासन का सहयोग करें व अपराधियों को किसी भी हालत में अपने यहां शरण देकर उनके गलत इरादों को न पनपने दे ।

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