खतरनाक स्थिति में आ गई है ‘भुखमरी’

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 डॉ.विक्रम चौरसिया क्रांतिकारी



जब गैस के दाम बढ़ते है, जब डीजल-पैट्रोल के दाम बढ़ते है, तो असर सीधे गरीबों और किसानो पर पड़ता है,अशिक्षित होने के कारण गरीबों को बैंक से लोन लेना हो तो घूस देना पड़ता है,या कोई भी सरकारी काम भी हो तो घूस देना पड़ता है । हमारे ‘कृषि प्रधान’ देश भारत में आज लोग भूख के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं, हमारे पास किसी भी विकासशील देश से ज्यादा कृषि योग्य भूमि है, अन्नदाता दिन रात खेतों में मेहनत करके इतना अन्न की उत्पादन कर रहे हैं की अनाज सरकारी गोदामों में सड़ रहा है या कहें की सरकार के गलत नीतियों या ढुलमुल रवैया के कारण आज देश में अन्न की बर्बादी हो रही है , जबकि यह अनाज वंचितों ,जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना सरकार की जिम्मेवारी है ।

देखिए न आज वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 में भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर आ गया है , यह तो पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी पीछे अब हम आ गए , इससे पहले भारत 2020 में 94वें स्थान पर था लेकिन 2021 में सात पायदान नीचे खिसक गया है,यह तो हमारे भारत में भूख के स्तर का ‘खतरनाक’ स्थिति आ गई है। आज दुनियां में जितने लोग भुखमरी के शिकार हैं, उनमें से एक चौथाई से अधिक लोग सिर्फ भारत में रह रहें है।ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी ही है अब कि आखिर हम कहां खड़े हैं और किस ओर जा रहे हैं।

एक तरफ हम खाद्य सुरक्षा की बात कर रहे हैं,भारत निर्माण की बात कर रहे हैं तो वही भविष्य में आर्थिक महाशक्ति बनने के सपने देख रहे हैं,तो वहीं दूसरी तरफ यह रिपोर्ट हमें देश की सच्ची तस्वीर को बयां करने के लिए काफी है,जो की हमारे सारे सपनों को मिनटों में ही चकनाचूर कर देता है। हम सभी ने देखा कि इस वैश्विक महामारी में बहुतों के काम धंधे चौपट हो गए तो वही बहुतों की नौकरियां छीनी गई जिससे पहले ही लोग परेशान थे.

अब यह बढ़ती महंगाई आम लोगों को भुखमरी के कगार पर ला दी तो वहीं कुछ लोग बड़े-बड़े नेताओं और ब्यूरोक्रेट से मिलकर कालाबाजारी करके गरीबों के रोटी पर भी डाका डाल रहे हैं ,तो वही इस कोरोना महामारी के दौर में जहां एक ओर स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुई है ,वहीं दूसरी ओर देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है, ऐसे समय में महंगाई ने हम आम आदमी की कमर तोड़ दी है, पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल, दाल, फल और सब्जियों के दाम दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं । आज महंगाई की मार से वह हर व्यक्ति पीड़ित है जो आर्थिक रूप से कमजोर है.



ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के फसलों की कीमत जितनी बढ़ती नही है, उससे ज्यादा महंगाई बढ़ जाती है, जिसकी ही वजह से उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा भी नही मिल पाती है,इसलिए उनके जीवन स्तर में सुधार नही हो पा रही है , महंगाई की वजह से गरीब कम उम्र में ही अपने बच्चों की पढ़ाई छुड़वा दे रहे है ,उन्हें अपने साथ काम पर लगा लेते है या तो उन्हें मुंबई-दिल्ली भेज देते है, ताकि वो घर के खर्चे में हाथ बंटा सके, कोई भी वंचित दिखे तो आपसे विनम्र निवेदन है कि आप भी अपने सामर्थ्य अनुसार जितना हो सके वंचित तबकों के लिए जो भी जरूरतमंद व्यक्ति आपकी नजरों से दिख जाएं हाथ आगे बढ़ाकर अपने सामर्थ्य अनुसार उसकी मदद जरूर करें, याद रखना 1 दिन हम सभी कोई आगे या पीछे इसी मिट्टी में मिट्टी मिट्टी हो जाएंगे , इसलिए मानवता को बचाने के लिए आगे बढ़कर अपनी सामर्थ्य अनुसार वंचितों का मदद के लिए हमेशा तत्पर रहिए।

चिंतक/आईएएस मेंटर/सोशल ऐक्टिविस्ट/दिल्ली विश्वविद्यालय 9069821319 लेखक सामाजिक आंदोलनो से जुड़े रहे है व वंचित तबकों के लिए आवाज उठाते रहे है ।

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