सत्य नफा नुकसान देखकर नहीं बोला जाता

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सुनील कुमार माथुर

सत्य बडा ही कडवा होता हैं जिसे हर कोई आसानी से नहीं सुन सकता हैं चूंकि सत्य बोलने वाला जब सत्य बोलता हैं तो वह नफा नुकसान नहीं देखता हैं । चूंकि सत्य को सत्य ही होता हैं । अतः जीवन में सदा सत्य बोलों । भले ही आपको सत्य बोलने पर लोग ताने मारे कि आया हैं बडा हरिशचंद्र की औलाद । लेकिन आप सत्य बोलने से न घबराये ।



लोभ लालच से सदैव नुकसान ही होता हैं । सुखी होने व सुख की नींद लेने के लिए व्यक्ति को ईमानदार व निष्ठावान होना चाहिए । ईमानदारी व्यक्ति हमेशा मेहनती होता हैं । वह मोह माया व लोभ लालच से सदैव दूर रहता हैं । व्यक्ति को कभी भी लोभ – लालच में नहीं पडना चाहिए । लोभ लालच में खोया गया धन हमेशा संयम से ही पुनः प्राप्त किया जा सकता हैं । आदमी जब जीवन में ठोकर खाता हैं तो वो उस ठोकर से बहुत कुछ सीख जाता हैं और वह ठोकर उसे जीवन भर याद रहती हैं ।

अतः जीवन में हमेशा सत्य के मार्ग पर ही चलें । बुरे लोगों का कभी भी साथ न करें । वहीं दूसरी ओर अच्छे लोगों का कभी भी साथ न छोडे । प्रेम, श्रद्धा, विश्वास, स्पष्टवादिता, सत्य व ईमानदारी यही तो हमारे जीवन की सबसे बडी पूंजी है । जिसने भी इसे खो दिया मानों उसने सब कुछ खो दिया । हमेशा अपना लक्ष्य तय करके ही आगें बढें अन्यथा बीच चौराहें पर भटक जायेंगे । लक्ष्य तो पहलें से ही निर्धारित होना चाहिए । तभी तो हम अपने निर्धारित लक्ष्य तक आसानी से पहुंच पायेंगे ।



आप जब भी कोई बात कहें तो ठोस बात कहें । सत्य कहें और आपकी बात सकारात्मक होनी चाहिए । कोई भी बात बिना लाग लपेट के कहें । किसी के दबाव में आकर या किसी को खुश करने के लिए घूमा फिराकर बात न करें । आपकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए जो भी करें उसमें ईमानदारी व सच्चाई होनी चाहिए । झूठ, छल , कपट नहीं । अंहकार से विनाश होता हैं ।

सादगी के साथ व समझदारी के साथ जीवन व्यतीत करें और लोक दिखावे के चक्कर में न पडें अन्यथा आप कहीं के भी नहीं रहेंगे । जीवन में जब भी वक्त मिलें तब आप अपने हुनर व प्रतिभा को निखारने का प्रयास करें । चौबीस घंटों में से कुछ वक्त अपने आपकों दीजिए ।



कहतें है कि एक मां की पीडा उसका बच्चा ही सही ढंग से समझ सकता हैं तो क्या बच्चे की मां अपने बच्चों की पीडा को बच्चों से भी अधिक अच्छी तरह से समझ सकती है भले ही वह अपनी पीडा से मां को अवगत न करायें । कहतें है कि भक्ति में ही शक्ति हैं । अतः व्यक्ति को हमेशा ईश्वर की पूजा व आराधना करनी चाहिए । इसके अलावा जरूरतमंद लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा करनी चाहिए । इंसान को हमेशा नेक दरियादिल होना चाहिए ।

यह कटु सत्य है कि व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भुगतना ही पडता हैं तो फिर हमेशा अच्छे कर्म ही करने चाहिए । हमारे महापुरुषों का कहना हैं कि भिक्षा पात्र तो भरा जा सकता हैं लेकिन इच्छा पात्र को कभी भी नहीं भरा जा सकता , इसलिए संतोष में ही परम सुख हैं । सबको हंसाना पर कभी भी किसी पर हंसना मत । सबके दुःख बांटना पर किसी को दुःखी मत करना । सबकी राह में दीप जलाना लेकिन किसी का दिल न जलाना , यहीं जीवन की रीत हैं । कहने का तात्पर्य यह है कि जैसा बोओगे , वैसा ही काटोगे ।



जीवन में खुश रहना हैं तो जिन्दगी के फैसलें अपनी परिस्थिति को देखकर ले चूंकि दुनियां को देखकर लिए गये फैसले अक्सर दुःख ही देते हैं । इस दुनियां में दो पौधे ऐसे हैं जो कभी मुरझाते नहीं है और अगर कभी मुरझा भी गये तो फिर उसका कोई इलाज नहीं है । पहला निस्वार्थ प्रेम और दूसरा अटूट विश्वास । रिश्ते, प्यार , मित्रता हर जगह पाये जातें है परन्तु ये ठहरते वही हैं जहां पर इनको आदर मिलता हैं ।

इसलिए जीवन में सदैव सत्य बोलें चूंकि सत्य नफा और नुकसान देखकर नहीं बोला जाता हैं । चूंकि सत्य सदा सत्य ही होता हैं । सत्य ही जीवन हैं । सत्य ही सुंदर हैं और सत्य ही शिव हैं । जो इस सत्य के पथ पर चल पडा समझों उसका जीवन सफल हो गया ।

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