सूरज चाँद सितारे तुम हो

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कविता नन्दिनी

माँ की आँखों के तारे हो
सूरज चाँद सितारे तुम हो
मेरी खुशियाँ हैं तुम सबसे
जीवन के हर रंग में तुम हो।

बाधाएँ जब भी आई हैं
मुझे तुम्हारा साथ मिला है
जब तक सांस चलेगी संग हैं
मन में यह विश्वास पला है।

सबके मन के तार जुड़े हैं
दिल की अरमानों का नाता
एक दूसरे का हित चाहें
एकाकी तन-मन अकुलाता।

रहो जहाँ भी मेरे भइया
खुशियाँ तेरा साथ निभाएँ
रहो निकट या दूर कहीं भी
जीवन की खुशियाँ सब पाएँ।

तेरे लिए सजाया मैंने
है राखी संग रोरी-चंदन
पूरे हों अरमान तुम्हारे
शुभ होवे यह रक्षाबंधन।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

Devbhoomi
From »

कविता नन्दिनी

कवयित्री

Address »
सिविल लाइन, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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