कविता : आकाश की छाया

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राजीव कुमार झा

सबसे अच्छा
साथ उसी का होता
जो अपने मन के साथ
सदा
रात की ठंडी छाया में
सोता
अरी सुंदरी,

सुबह हिलोरें लेता सागर
जब पांव तुम्हारे
धोता
किनारे खूब दूर तक
फैली धरती
यहां विहंसती
चारो ओर दिखाई

देती
बारिश में
वह कुछ दिन पहले
जी भरकर नहाई
उसके बाद
यहां शाम में चिड़िया
चहचहाई
सुबह आकाश

धूप से भर
गया
आज का दिन
मानो ऐसा लगा
सबसे हो नया
सपनों की रानी

सबसे सुंदर लगती
अब खूब सयानी
प्रेमभरी गलियों से
होकर मेले में आयी
हवा नदी किनारे
सबको भायी

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¤  प्रकाशन परिचय  ¤

Devbhoomi
From »

राजीव कुमार झा

कवि एवं लेखक

Address »
इंदुपुर, पोस्ट बड़हिया, जिला लखीसराय (बिहार) | Mob : 6206756085

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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