नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की

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सुनील कुमार माथुर

भगवान कृष्ण का प्राकट्योत्सव जन्माष्टमी प्रति वर्ष देश भर में प्रारम्भिक हर्षोल्लास के माहौल मे धूमधाम के साथ मनाया जाता है । मध्य रात्रि को घडी की सुइयां मिलते ही वैष्णव भक्तों व सभी कृष्ण मंदिरों में नंद के आनंद भयो——जय कन्हैया लाल की गूंज से गूंज उठते है । पुष्टीमार्गीय परम्परा के मंदिरों में ढोल – थाली एवं शंख ध्वनि के बीच कान्हा का जन्म महौत्सव मनाया जाता है।

आकर्षक रोशनी व फूलों से सजे प्रमुख कृष्ण मंदिरों में भगवान के जन्म से जुडी झांकियों के दर्शन के प्रति बच्चों युवाओं, महिलाओं व बुजुर्गों में उत्साह देखने लायक होता है जन्माष्टमी का व्रत रख भक्तगण कृष्ण प्राकट्योत्सव के बाद पंजीरी सेवन कर पारणा करतें है।

मंदिर में जन्माष्टमी के उपलक्ष में मध्य रात्रि को जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं में गूंदगिरी , अजवायन, सोठ के लड्डू व पंचामृत वितरित किया जाता है । गोविन्दाओं की टोलियां मानव श्रृख॔ला , मानव पिरामिड बनाकर दही से भरी हांडी ( मटकी ) फोड़ते है तो समूचा कृष्ण मंदिर परिसर भगवान कृष्ण के जैकारों से गूंज उठता है । उस वक्त उत्साह उमंग से सरोबार माहौल में श्रद्धालुओं के जयघोष के बीच टोलियों में आस्था, संयम और धैर्य का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है एवं देर रात तक मंदिरों में भक्तों का तांता लगा ही रहता है ।

व्यक्ति के चिन्तन में श्रीकृष्ण का आना ही वास्तविक जन्माष्टमी हैं । हृदय का आनंदयुक्त होना ही कृष्ण के आगमन का संकेत है । भगवान को पाने की उत्कण्ठा का नाम ही प्रार्थना हैं । इस प्रकार देर रात जन्मोत्सव तक भजनों का सिलसिला चलता रहता है ।

कई जगह श्रीकृष्ण महोत्सव पर शोभा यात्रा का भी आयोजन किया जाता हैं । गाजे बाजे के साथ आयोजित शोभायात्रा के दौरान कारागृह में कृष्ण, यशोदा कृष्ण, राधाकृष्ण, कंस के साथ युद्ध, सुदामा कृष्ण, गोपाल कृष्ण, वासुदेव देवकी सहित कृष्ण लीलाओं से ओत-प्रोत आकर्षक झांकियां निकाली जाती है व जगह- जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया जाता हैं । कार्यकर्ता रंग बिरंगे साफे पहनें कृष्ण नाम संकीर्तन पर नृत्य करतें चलतें रह्ते है ।

वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के चलतें मंदिर बंद रहें व कहीं भी सार्वजनिक आयोजन नहीं हुए । लोगों को अपने-अपने घरों में रहकर ही जन्माष्टमी मनानी पडीं चूंकि सरकारी दिशा निर्देशों की पालना करनी जरूरी था और जहां था वही घर में ही जन्माष्टमी मनानी पडी । कोरोना महामारी के चलतें मंदिरों के कपाट दर्शनार्थियों के लिए बंद होने से वैष्णव भक्तों को घरों में ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक करके जन्माष्टमी मनानी पडीं । जन्माष्टमी से जुडे दही माखन मटकी फोड प्रतियोगिता व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं हो सकें । लेकिन इस बार जनता में भारी उत्साह और उमंग देखने को मिल रही हैं ।

कहतें है कि जन्माष्टमी मनाकर हर मनोकामना पूर्ण की जा सकती है । श्री कृष्ण ने हर बुराई का अंत किया है और उनकी लीलाओं को कृष्ण प्रेम में डूब कर देखा जाना चाहिए चूंकि उनकी हर लीला निराली होती है । कृष्ण को सदैव सात्विक भोजन अर्पित करें।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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सुनील कुमार माथुर

स्वतंत्र लेखक व पत्रकार

Address »
33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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