हम धर्म की रक्षा करेगे तभी धर्म हमारी रक्षा करेगा

हम धर्म की रक्षा करेगे तभी धर्म हमारी रक्षा करेगा, उन्होंने कहा कि जहां भगवान होते हैं वहां अभिमान नहीं होता हैं और जहा़ अभिमान होता है वहां भगवान नहीं होते हैं। कथाप्रेमी माथुर ने बताया कि…
जोधपुर। गोसेवक कथावाचक अशोक महाराज दाधिच ने कहा हैं कि हम धर्म की रक्षा करेंगे तभी धर्म हमारी रक्षा करेगा। वे शोभावतों की ढाणी में यू आई टी पार्क मे़ चल रही भागवत कथा के दौरान उक्त उद् गार व्यक्त किये। कथाप्रेमी सुनील कुमार माथुर ने बताया कि कथा के दौरान पं दाधिच ने कहा कि आज भगवान की भक्ति दोरी हो गयी हैं और थारीमारी करनो सोरी हो गयों हैं जो एक चिंता की बात हैं।
उन्होंने कहा कि ईश्वर, माता पिता व गाय की सेवा कर ले तो जीवन में कल्याण ही कल्याण हैं। उन्होंने कहा कि धन, मकान, गाडी, बंगला चला गया तो मेहनत करके धन पुन कमाकर भौतिक सुख की जरूरतों को प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन हमारा चरित्र चला गया तो समझो हमारा सब कुछ चला गया और गया चरित्र पुन प्राप्त नहीं किया जा सकता अत अपने चरित्र को बनाये रखें।
उन्होंने कहा कि जहां भगवान होते हैं वहां अभिमान नहीं होता हैं और जहा़ अभिमान होता है वहां भगवान नहीं होते हैं। कथाप्रेमी माथुर ने बताया कि कथा के दौरान पं दाधिच ने कहा कि इस संसार में आये हैं और हमने अपने चरित्र को बचा लिया तो समझों कि बहुत कुछ बचा लिया। जीवन में जो जैसा करता हैं, वैसा ही भरता है़।
पं दाधिच ने कहा कि दान ऐसा कीजिये कि दान देंने के बाद दान देने वाले और दान लेने वाले दोनों की आत्मा तृप्त हो जाये। उन्होंने कहा कि गऊशाला, मंदिर, गुरू, संत महात्माओं के आश्रम में व बेटी के घर कभी भी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। इसी प्रकार आपके घर से गाय, कुता, गरीब आदमी, संत व ब्राह्मण व ननंद कभी भी खाली हाथ नहीं जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि आप दूसरों से अपने प्रति व्यवहार चाहते है वैसा ही व्यवहार आप दूसरों के प्रति कीजिये। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए अपने बच्चों को अभी से ही आदर्श संस्कार दीजिये।
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