
यह रचना हिन्दी को केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि देश की पहचान, एकता और गौरव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती है। कवि ने विविधता में एकता, मातृभाषा के सम्मान और हिन्दी के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को सरल शब्दों में अभिव्यक्त किया है।
- हिन्दी: हमारी पहचान और अभिमान की भाषा
- एकता की धड़कन है हिन्दी
- हिन्दी मातृभाषा का गौरवगान
- हिन्दी में बसता है भारत का मान
भुवन बिष्ट
रानीखेत (उत्तराखंड)
Government Advertisement...
हिन्दी न केवल बोली भाषा, यह हमारी शान है।
प्यारी मातृभाषा यह हमारी, हिन्दी बड़ी महान है।
चमकते तारे आसमां के, हिन्द देश के वासी हम।
कोई चंद्र यहां कोई रवि, कोई यहां भी है न कम।
यह आसमां बनकर सदा, हिन्दी मेरी पहचान है।
हिन्दी न केवल बोली भाषा , यह हमारी शान है।
प्यारी मातृभाषा यह हमारी, हिन्दी बड़ी महान है।
पूरब है कोई पश्चिम यहां, उत्तर कोई दक्षिण यहां।
अलग अलग है बोलियां, पर एक सबका है ये मन।
अंग हिन्द के हम सभी, हिन्दी दिल की है धड़कन।
यह एकता में बांधे हमको, इस पर हमें अभिमान है।
सेवा करते हिन्दी की हम, लेखनी का यह सम्मान है।
हिन्दी न केवल बोली भाषा, यह हमारी शान है।
प्यारी मातृभाषा यह हमारी, हिन्दी बड़ी महान है।









