सिद्धार्थ गोरखपुरी रह-रह कर ये अक्सर सवाल आता है के क्या कभी मेरा भी खयाल आता है...
सिद्धार्थ गोरखपुरी
सिद्धार्थ गोरखपुरी ऐ मेघ ले – ले जद में अपने इस समूचे आसमां को कर दे गर्मी...
सिद्धार्थ गोरखपुरी माँ को न शहर अच्छा लगा न न शहर की शहरियत अच्छी लगी वो लौट...
सिद्धार्थ गोरखपुरी बचपने से सबको खुश कर देना और जवां होना। बस उँगलियों के इशारों से ,सब...
सिद्धार्थ गोरखपुरी रंग लो खुद को गाँव के रंग में तन – मन गाँव में ढाल के...









