मुकेश कुमार ऋषि वर्मा राम-राम मेरे श्रीराम, नमन तुम्हें मेरा शत बार । दर्शन तुम्हारा मेरा त्यौहार...
साहित्य लहर
राजीव डोगरा तुमने तो पूरी कोशिश की हमारी खिल्ली उड़ाने की हर जगह हरा तरफ , हम...
राजीव कुमार झा खामोश नजरों में चमक समा रही जिंदगी करीब आ गयी खत्म हो गया गुजरा...
सुनील कुमार मत काटो इन हरे-भरे पेड़ों की डाली वरना मिट जाएगी धरा से हरियाली। https://devbhoomisamachaar.com/wp-content/uploads/2026/04/SM-Add-Apr-2026.mp4 सदियों...
सुनील कुमार धरती है हम सबकी माता हम इसकी संतान हैं धरती से है अन्न-जल-जीवन धरती से...
प्रेम बजाज तुम आते हो जब ख्यालों में तो बनती है गज़ल, चले जाते हो छोड़कर तब...
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा जब शासन नाकारा हो जाता है अपनी नाकामी छुपाने को जनता का खून...
सिद्धार्थ गोरखपुरी https://devbhoomisamachaar.com/wp-content/uploads/2026/04/SM-Add-Apr-2026.mp4 ऐ मेघ ले – ले जद में अपने इस समूचे आसमां को कर दे...
कविता नन्दिनी उलझनों के जंगल में धैर्य डगमगाता है ज़िंदगी की राहों में उलझनों से नाता है।।...
सुनील कुमार माथुर हम एक ही शक्ति और एक ही ईश्वर के अंश है तब फिर यह...











