कविता नन्दिनी ऐसी दुनिया बनानी अभी है हमें जिसमें भरती उड़ाने रहें बेटियाँ बेटी-बेटे तो आँखों की...
साहित्य लहर
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा राम-राम मेरे श्रीराम, नमन तुम्हें मेरा शत बार । दर्शन तुम्हारा मेरा त्यौहार...
राजीव डोगरा तुमने तो पूरी कोशिश की हमारी खिल्ली उड़ाने की हर जगह हरा तरफ , हम...
राजीव कुमार झा खामोश नजरों में चमक समा रही जिंदगी करीब आ गयी खत्म हो गया गुजरा...
सुनील कुमार मत काटो इन हरे-भरे पेड़ों की डाली वरना मिट जाएगी धरा से हरियाली। सदियों से...
सुनील कुमार धरती है हम सबकी माता हम इसकी संतान हैं धरती से है अन्न-जल-जीवन धरती से...
प्रेम बजाज तुम आते हो जब ख्यालों में तो बनती है गज़ल, चले जाते हो छोड़कर तब...
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा जब शासन नाकारा हो जाता है अपनी नाकामी छुपाने को जनता का खून...
सिद्धार्थ गोरखपुरी ऐ मेघ ले – ले जद में अपने इस समूचे आसमां को कर दे गर्मी...
कविता नन्दिनी उलझनों के जंगल में धैर्य डगमगाता है ज़िंदगी की राहों में उलझनों से नाता है।।...











