सिद्धार्थ गोरखपुरी तुम मेरे हुए और सारे मशले हमारे हो गए मेरे यार! हम तो खुद के...
साहित्य लहर
अजय एहसास हर बात पर यूं आंसू बहाया नहीं जाता हर बात दिल का सबको बताया नहीं...
बंजारा महेश राठौर सोनू किसने बताया मजबूरियों को मेरे घर का पता रोज – रोज मेरे घर...
आशुतोष लंबे संघर्ष के बाद, सत्ता में आए हैं हम l सिर्फ दो सांसद से, तीन सौ...
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा आओ सब जन मिलकर दीप जलाएं । अंधेरा मिटाकर उजाला घर ले आएं...
सुनील कुमार माथुर साहित्यकार की लेखनी जब चलती हैं तब वह सदा सत्य ही लिखती है चूंकि...
भुवन बिष्ट जय अम्बे जय जगदम्बे मां, जय दुर्गे मातु भवानी। शक्ति स्वरूपा बुद्धिदाती,जय जगत मां कल्याणी।।...
वीरेंद्र बहादुर सिंह देव बन कर पुजवाना क्या पत्थर के हाथ में है? बोझ लेकर डूबना क्या...
राजीव कुमार झा आवारों की बदनाम बस्ती में तुम्हारी बातें धूप खत्म होने के बाद शाम की...
आशुतोष पैंतीस बरस बिहार के जोतलीं अब सोचत ही जोतब दिल्ली हो बिहार पलायन के युग में...














