October 31, 2026

साहित्य लहर

सिद्धार्थ गोरखपुरी जेहन का हर बोझ त्यागकर मन का हर इक संकोच त्यागकर भेद मैं मन के...
राजेश ध्यानी दीवाना पंछी पेड़ में बेठा कुहू कुहू चिल्लाये , हवा ने उसका साथ दिया दिवानी...
राजेश ध्यानी सागर आज तू भी कुछ लिख दे यार मेरे लिए। क्या तेरे पास कलम नहीं?...
संजना हर जगह हरियाली छाई है, हरे भरे पेड़-पौधों ने बिछाई है । हर जगह रंगीन नजारा...
कवि प्रणव भास्कर तिवारी ‘शिववीर’ पूरे ब्राह्मण, महुलारा, राम सनेही घाट, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश सखी संग अदिति...
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