कविता : आमजन का हो ख्याल… भूल चुके है सैर सपाटे सारी कमाई खा जाता पेट बिजली पानी...
साहित्य लहर
कविता : पछतावा… ज्ञानराशि संचित कर खूब लुटाऊंगा कवि- लेखक बन मां भारती के गुण गाऊंगा राष्ट्र...
कविता : कुप्रथा है दहेज प्रथा… तेरी दुल्हन बनकर जब तेरे, घर आई थी। ढेरों सपने साथ लेके...
कविता : आम के मंजर… तुम्हारा मन तालाब के किनारे पीपल की छाया में भूले बिसरे गीतों...
कविता : वसंत का आंगन… झुरमुट में झरबेरियां रसभरी मेले में बाजार आयीं औरतें वापस गांव चल...
कविता : फूल… मैं धरती की सुंदरता हूं, मां के आंचल में खिलती हूं। रंग बिरंगे रंगों...
कविता : समय… समय के लिए डाँट मैं खाता, कभी मायूस हो जाता था. जब से मैंने...
लघुकथा : अंधविश्वास की मौत… इस लघुकथा से यह शिक्षा मिलती है कि हमें समय अनुरूप बदलावों...
कविता : मोबाइल… इसके हाथ में आते ही, बच्चे से लेकर बूढ़े तक ऐसे खो जाते हैं, फिर...
कविता : गणतंत्र पर्व की खुशियां… वीर शहीदों को श्रद्धा सुमन चढ़ाएंगे हम, एकता-अखंडता अक्षुण्य बनायेंगे हम,...














