सुनील कुमार भौतिकता की अंधी दौड़ में क्या से क्या हम हो गए कल तक थे जो...
साहित्य लहर
डॉ एम डी सिंह भला रण कैसा जहां रार नहीं हो संबंध कैसे जहाँ तकरार नहीं हो...
सुनील कुमार माथुर अगर देश में अमन चैन चाहते हो तो एक ही विकल्प है स्थिरता अगर...
सुनील कुमार माथुर अगर समाज का उत्थान चाहते हो तो मातृशक्ति और युवाओं को समाज उत्थान के...
संजना तन्हा दिल है न जाने कब से , तुम मिलकर भी न मिल पाए। तन्हा है...
सुनील कुमार वंदन-नमन-अभिनंदन बारम्बार करते हैं मां भारती को हम प्रणाम करते हैं। ज्ञान-ध्यान का दीप जला...
नवाब मंजूर आती बारी सबकी बारी बारी बारी! भेद न इसमें म्हारी थारी। निकले पल में- सारी...
सुनील कुमार उम्मीद छोड़ चुके लोगों में भी उम्मीद की किरण जगाते हैं अपनों से भी ज्यादा...
राजीव डोगरा मैं लिख रहा हूं तुमको तुम पढ़ लेना खुद को अगर न समझ आये कुछ...
सुनील कुमार घुट रहा है दम मेरा शहर की इन फिजाओं में अब सुकून भरी छांव चाहता...













