May 28, 2026

साहित्य लहर

मो. मंजूर आलम “नवाब मंजूर” है कहना कठिन बहुत बुरा गुजरा हर शय हर चमन उजड़ा कल...
विनोद सिंह नामदेव “शजर शिवपुरी” अश्क़ आँखों में भर गया कोई। देश पर फिर से मर गया...
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