सुनील कुमार वक्त और हालात से मजबूर है कितना बेबस मजदूर है। दो जून की रोटी के...
साहित्य लहर
मो. मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर देखो! बेचने वाले बेच रहे हैं चांद की भी जमीन बिना...
सुनील कुमार माथुर गुरु कहते है कि आज विधार्थी अध्यापकों का सम्मान नहीं करते और विधार्थी कहते...
मो. मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर जरा सी हो धूप जाड़े की सी! बीछी हो दूब हरी...
सुनील कुमार छोड़ बाबुल का घर पिया के घर आयी है न जाने क्यों लोग पूछते हैं...
अशोक शर्मा ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं है अपना ये त्यौहार नहीं है अपनी ये तो...
सुनील कुमार माथुर देखों शराबी शराब पीकर कितना मस्तमोला है , कितनी मस्ती में है न उसे...
अजय एहसास ये दिल हर बात को छुपाता बहुत है दिखता नहीं पर दिल से उसे अपनाता...
रोहित ठाकुरद्वारा में शिव जी मंदिर का गांव में भोले भाले लोगों का स्कूल में हेडमास्टर सर...
राजीव डोगरा मैं समय हूं कभी रुकता नहीं, कभी झुकता नहीं कभी थकता भी नहीं, मैं अस्थिर...














