राजीव डोगरा मैं लिख रहा हूं तुमको तुम पढ़ लेना खुद को अगर न समझ आये कुछ...
साहित्य लहर
सुनील कुमार घुट रहा है दम मेरा शहर की इन फिजाओं में अब सुकून भरी छांव चाहता...
सुनील कुमार माथुर देखो इस संसार में चारों ओर कलह है पिता पुत्र में, सास बहू में...
सुनील कुमार मीत मेरे बचपन के जाने कहां खो गए छोड़ गांव की गलियां शहर की भीड़...
मो. मंजूर आलम “नवाब मंजूर” है कहना कठिन बहुत बुरा गुजरा हर शय हर चमन उजड़ा कल...
विनोद सिंह नामदेव “शजर शिवपुरी” अश्क़ आँखों में भर गया कोई। देश पर फिर से मर गया...
सुनील कुमार माथुर देखो आज का मानव शांति की खोज में कितना बावला हो गया है वह...
सुनील कुमार माथुर देखो देश में चारों ओर मंहगाई द्रोपदी के चीर की भांति बढती ही जा...
सुनील कुमार जीवन की इस भाग-दौड़ से जब थोड़ी-सी फुर्सत पाता हूं बंद कर पलकें अपनी बचपन...
सुनील कुमार माथुर इस सभ्य कहे जाने वाले समाज में दहेज का दानव फन फैलाये बैठा है...














