
चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्वास्थ्य जांच कराए बिना बदरीनाथ धाम पहुंच रहे हैं, जिससे ऊंचाई वाले क्षेत्र में उनकी तबीयत बिगड़ने के मामले बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 54,007 श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग की गई है, जबकि धाम में आठ लाख से अधिक यात्री दर्शन कर चुके हैं। बदरीनाथ धाम और आस्था पथ क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अब तक 40 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो चुकी है।
- बदरीनाथ धाम में बढ़े बीपी और सांस संबंधी समस्याओं के मामले
- 54 हजार श्रद्धालुओं की हुई स्क्रीनिंग, लाखों बिना जांच पहुंचे धाम
- चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य विभाग ने जारी की नई चेतावनी
- ऊंचाई और कम ऑक्सीजन बनी यात्रियों के लिए चुनौती
चमोली। चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ाव बदरीनाथ धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही चिंताजनक स्थिति पैदा कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बड़ी संख्या में श्रद्धालु निर्धारित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग प्रक्रिया से बचते हुए सीधे धाम तक पहुंच रहे हैं। परिणामस्वरूप ऊंचाई वाले क्षेत्र में पहुंचने के बाद कई यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। बदरीनाथ धाम और आस्था पथ क्षेत्र में अब तक 40 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जिसने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। चारधाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ धाम में दर्शन करने पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
पिछले एक माह के दौरान ही आठ लाख से अधिक श्रद्धालु बदरीविशाल के दर्शन कर चुके हैं। इसके बावजूद धाम से लगभग 15 किलोमीटर पहले पांडुकेश्वर में स्थापित स्वास्थ्य जांच केंद्र पर अपेक्षाकृत बहुत कम लोग स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 54,007 श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग की जा सकी है, जो कुल यात्रियों की संख्या की तुलना में काफी कम है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बदरीनाथ धाम समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित है, जहां ऑक्सीजन का स्तर सामान्य क्षेत्रों की तुलना में कम होता है। ऐसे वातावरण में उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, अस्थमा, श्वसन संबंधी समस्याओं या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
स्वास्थ्य जांच न कराने वाले श्रद्धालुओं को ऊंचाई पर पहुंचते ही अचानक सांस लेने में कठिनाई, चक्कर आना, रक्तचाप बढ़ना और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बदरीनाथ धाम के सरकारी अस्पताल, एमआरपी सेंटर तथा आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से अब तक 7,050 श्रद्धालुओं को उपचार और चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। इनमें बड़ी संख्या उन यात्रियों की है जिन्हें धाम पहुंचने के बाद स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें महसूस हुईं। अस्पतालों में सबसे अधिक मामले उच्च रक्तचाप, ऑक्सीजन की कमी और सांस लेने में परेशानी से जुड़े सामने आए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता ने बताया कि सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है।
इसलिए विभाग ने जोखिम वाले समूहों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति तथा स्वास्थ्य जोखिम वाले यात्रियों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही यात्रा करनी चाहिए। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक जिन 54,007 श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग की गई है, उनमें से 2,891 श्रद्धालु 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक श्रद्धालु स्क्रीनिंग प्रक्रिया में भाग लें तो गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी गंभीर मामलों की संख्या भी चिंता का विषय बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बदरीनाथ धाम और गौचर से बदरीनाथ तक के आस्था पथ क्षेत्र में स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण अब तक 40 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा छह गंभीर रूप से बीमार यात्रियों को हेलिकॉप्टर के माध्यम से तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया गया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी। श्रद्धालुओं को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर सूचना बोर्ड स्थापित किए हैं। इन बोर्डों पर क्यूआर कोड भी लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन करके यात्री स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण सलाह, सावधानियां और आपातकालीन जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विभाग लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पिएं, आवश्यक दवाइयां साथ रखें, अत्यधिक थकान से बचें और किसी भी प्रकार की अस्वस्थता महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
विशेषज्ञों का कहना है कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अभियान है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है और ऑक्सीजन स्तर कम होने के कारण सामान्य व्यक्ति को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना और अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराना यात्रियों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि श्रद्धालु यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपनाएं तो दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य आपात स्थितियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। चारधाम यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता के बीच सुरक्षित और स्वस्थ यात्रा सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।





