किसी परेशान और दुःखी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाना एक कठिन लेकिन महत्वपूर्ण कला है, जो उसे तनाव से बाहर निकालकर सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद कर सकती है। आलेख में 20 सितंबर 2026 को प्रसारित ‘जी रिश्तों का मेला’ गणपति स्पेशल कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मनोरंजन और हास्य की भूमिका को रेखांकित किया गया है। लेखक का मानना है कि हर कलाकार की कला को प्रोत्साहन मिलना चाहिए और हंसी-मजाक के साथ आदर्श संस्कारों का भी समावेश होना चाहिए।
- मुस्कान बाँटना भी एक हुनर है
- हंसी से दूर होता है तनाव
- किसी को हंसाना आसान नहीं
- हास्य में छिपी जीवन की खुशी
सुनील कुमार माथुर
किसी परेशान व्यक्ति को हंसाना भी एक कला है। आज के समय में हर कोई किसी न किसी बात को लेकर टेंशन में जीवन व्यतीत कर रहा है। ऐसे समय में उन्हें हंसाना नितांत आवश्यक है, अन्यथा वे आत्महत्या कर रहे हैं। हंसाने से, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने से वह काफी हद तक टेंशन मुक्त हो जाता है और फिर से समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाता है। किसी दुःखी, पीड़ित इंसान को हंसाना हर किसी के बस की बात नहीं है और यह काम कहना आसान है, लेकिन व्यवहार में कठिन कार्य है।
रविवार, 20 सितम्बर 2026 को सायं 6 बजे से रात्रि 8-30 बजे तक जी टीवी पर ‘जी रिश्तों का मेला’ गणपति स्पेशल कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम से घर-घर में माहौल भक्तिमय हो गया, जिसने भी इस कार्यक्रम को देखा वह वाह-वाह कर उठा। ‘तुम से तुम तक’, ‘लक्ष्मी निवास’, ‘वसुधा’ और ‘जगदात्री कुटुम्ब’ के साथ ही साथ कॉमेडी के कलाकारों ने भी अपनी महती भूमिका निभाई।
इस कार्यक्रम के माध्यम से हर किसी ने वास्तव में मनोरंजन की दुनिया को करीब से देखा। सभी कलाकारों ने अपने-अपने हुनर से दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया। जबकि आज के दौर में किसी के चेहरे पर हंसी लाना एक बहुत ही बड़ी बात है। आज हर किसी के चेहरे से मुस्कान गायब है। कोई तन दुःखी है, कोई मन दुःखी है तो कोई धन दुःखी है। ऐसे समय में ऐसे हास्यास्पद कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते रहने चाहिए, जहाँ हंसी-मजाक व आदर्श संस्कारों का मिलन हो।
कार्यक्रम के दौरान कॉमेडी का भी तड़का देखने को मिला। जिसने इतना हंसाया कि हंसते-हंसते पेट में बल पड़ गए। चूंकि कला कोई भी क्यों न हो, वह छिपाए नहीं छिपती है और भीतर ही भीतर हिरण की तरह कुलांचे मारती रहती है और कलाकार अपने आप को रोक नहीं पाता है। अतः कलाकार कोई भी हो, उसकी कला को सदैव प्रोत्साहन मिलना चाहिए, अन्यथा वह कला दम तोड़ देगी। हर कला माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होती है, इसलिए कलाकार पर हर समय माँ सरस्वती का आशीर्वाद बना रहता है और वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर माँ सरस्वती के आशीर्वाद को बनाए रखता है।
सुनील कुमार माथुर
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार एवं
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच
33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआँ, पालरोड, जोधपुर, राजस्थान

