यह प्रेम-कविता दो मनों के बीच गहरे विश्वास, साथ और भावनात्मक जुड़ाव की कल्पना प्रस्तुत करती है। नदी के दो तट, एक दीपक की दो बाती और अंधियारों में साथ चलने जैसे सुंदर बिंबों के माध्यम से प्रेम, समर्पण और साझा सपनों को अभिव्यक्त किया गया है। कविता का मूल भाव दो हृदयों के एक धड़कन बन जाने और जीवन के हर पड़ाव पर साथ निभाने का है।
- दो मन, एक धड़कन
- साथ तुम्हारा, गीत हमारा
- प्रेम की राह में हमसफ़र
- एक दीपक, दो बाती
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाकघर तारौली गूजर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश
एक नदी के दो तट
सागर में मिल खुल जाएँ पट
हृदय दो, एक हो धड़कन।
मेरा और तुम्हारा मन।।
कदम-कदम हो साथ तुम्हारा
शब्द तुम्हारे गीत हमारा
बाहों में भर लें सारा गगन।
मेरा और तुम्हारा मन।।
अंधियारों में साथ चले
एक से दो हम हैं भले
विश्वास अटूट, हम हैं मगन।
मेरा और तुम्हारा मन।।
बने एक दीपक दो बाती
हम मीत चलाएँ प्रेम रीत
हो जाएँ साकार सारे स्वप्न।
मेरा और तुम्हारा मन।।
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाकघर तारौली गूजर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश

