दिल्ली के जीबी रोड पर SIR के दौरान बड़ी संख्या में सेक्स वर्कर्स के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं दिखाई देने से दस्तावेज और सत्यापन को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पहले मतदाता सूची में दर्ज करीब 650 सेक्स वर्कर्स में से लगभग 500 के नाम “shifted” या पात्रता संबंधी दस्तावेजों की समस्या के कारण प्रभावित हुए हैं। निर्वाचन अधिकारियों ने 23-24 सितंबर को सेक्स वर्कर्स सहित कुछ वंचित समूहों के लिए विशेष शिविर लगाने की घोषणा की है, जबकि दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया अभी जारी है।
- जीबी रोड की महिलाओं के वोट पर दस्तावेजों का संकट
- SIR में जीबी रोड की सेक्स वर्कर्स के नाम क्यों प्रभावित हुए?
- वोटर लिस्ट से नाम गायब, अब विशेष शिविर से उम्मीद
- जीबी रोड की वोटर लिस्ट और SIR का पूरा मामला
दिल्ली | दिल्ली के जीबी रोड पर रहने वाली सेक्स वर्कर्स इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के कारण चर्चा में हैं। SIR के तहत 31 अगस्त को जारी दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में पुराने नाम दिखाई नहीं दिए। इसी क्रम में जीबी रोड की सेक्स वर्कर्स के मतदाता रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठे हैं। जीबी रोड पर करीब 1,300 मतदाताओं से जुड़े क्षेत्र के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पिछली मतदाता सूची में लगभग 650 सेक्स वर्कर्स के नाम दर्ज थे। इनमें से कम से कम 500 नाम ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें “shifted” के रूप में चिह्नित किया गया या जिनकी पात्रता आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में स्थापित नहीं हो सकी। यह आंकड़ा अधिकारियों से साझा जानकारी पर आधारित मीडिया रिपोर्टों में सामने आया है।
दस्तावेज बने बड़ी चुनौती
SIR प्रक्रिया में मतदाता को अपने पुराने चुनावी रिकॉर्ड से संबंध स्थापित करने या निर्धारित दस्तावेजों के माध्यम से पात्रता साबित करने की आवश्यकता पड़ सकती है। जीबी रोड की कई महिलाओं के लिए यही प्रक्रिया कठिन साबित हो रही है।रिपोर्टों के अनुसार, कई महिलाएं वर्षों से दिल्ली में रह रही हैं, लेकिन उनके पास जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल प्रमाणपत्र, पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड अथवा अपने माता-पिता से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
कुछ महिलाओं के बारे में रिपोर्टों में बताया गया है कि वे कम उम्र में दिल्ली लाई गई थीं और बाद में अपने परिवार से संपर्क खो बैठीं। एक रिपोर्ट में 36 वर्षीय महिला का उदाहरण दिया गया है, जिसने 2008 में वोटर आईडी प्राप्त की थी और पहले चुनावों में मतदान भी किया था। वर्तमान SIR प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड से संबंध स्थापित करने के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे कठिनाई का सामना करना पड़ा।
“Shifted” दर्ज होने पर भी सवाल
मामले का एक दूसरा पहलू “shifted” श्रेणी से जुड़ा है। जीबी रोड पर काम करने वाली कुछ महिलाओं के अनुसार वे इलाके से बाहर नहीं गई हैं। कई बार वे एक ही क्षेत्र में अलग-अलग कमरों या स्थानों पर रहती हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि स्थानीय स्तर पर पता बदलने या सत्यापन के दौरान दर्ज की गई स्थिति का उनके वास्तविक निवास से कितना संबंध है। हालांकि, किसी व्यक्ति के नाम के “shifted” के रूप में चिह्नित होने का अर्थ यह नहीं है कि उसका नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से बाहर हो गया है। ड्राफ्ट सूची के बाद दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया उपलब्ध है।
Aadhaar और वोटर पात्रता
इस पूरे विवाद में Aadhaar को लेकर भी भ्रम सामने आया है। Aadhaar पहचान और विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन वह अपने आप में भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है। इसलिए केवल Aadhaar में जीबी रोड का पता दर्ज होना SIR के तहत मतदाता पात्रता के सभी सवालों का स्वतः समाधान नहीं करता। यही वजह है कि ऐसी महिलाओं के लिए पुराने चुनावी रिकॉर्ड और निर्धारित दस्तावेज जुटाना महत्वपूर्ण हो गया है।
चुनाव अधिकारियों ने उठाया विशेष कदम
मामला सामने आने के बाद दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बेघर लोगों, ट्रांसजेंडर लोगों और सेक्स वर्कर्स जैसे समूहों के लिए विशेष शिविर आयोजित करने की घोषणा की है। रिपोर्टों के अनुसार ये विशेष शिविर 23 और 24 सितंबर 2026 को शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक लगाए जाएंगे। इन शिविरों में बूथ लेवल अधिकारी पात्र लोगों को मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में सहायता करेंगे। इसके अलावा 20 और 27 सितंबर को दिल्ली के मतदान केंद्रों पर भी विशेष शिविर आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है, जहां मतदाता अपना नाम जांचने और आवश्यक आवेदन जमा करने में सहायता ले सकते हैं।
अभी मामला अंतिम नहीं
जीबी रोड की महिलाओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं दिखाई देने को लेकर चिंता जरूर सामने आई है, लेकिन इसे अभी अंतिम रूप से मताधिकार समाप्त होना कहना सही नहीं होगा। दिल्ली की ड्राफ्ट सूची के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है। इस बीच दिल्ली की व्यापक SIR प्रक्रिया भी न्यायिक जांच के दायरे में है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में नोटिस पाने वाले लाखों मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस दिए जाने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की गई है। इस मामले पर 22 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।
सवाल केवल जीबी रोड का नहीं
जीबी रोड का मामला यह सवाल जरूर सामने रखता है कि मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया में ऐसे लोगों तक प्रशासनिक सहायता कैसे पहुंचे, जिनके पास पुराने पारिवारिक या शैक्षणिक दस्तावेज नहीं हैं। एक ओर मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना चुनाव प्रक्रिया की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर पात्र नागरिकों को दावा और आपत्ति की प्रक्रिया तक पहुंच उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अब विशेष शिविरों और दावे-आपत्ति की प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि जीबी रोड की कितनी प्रभावित महिलाओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल हो पाते हैं। फिलहाल मामला प्रक्रिया के स्तर पर है और अंतिम स्थिति अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही स्पष्ट होगी।

