
चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ हेली सेवा और होटल बुकिंग के नाम पर साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है। उत्तराखंड एसटीएफ की जांच में बिहार के नवादा, पटना, गया और बिहारशरीफ से संचालित गिरोहों की भूमिका सामने आई है। एसटीएफ अब तक 200 से अधिक फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट बंद करा चुकी है।
- चारधाम यात्रा में सक्रिय साइबर ठग, 200 फर्जी वेबसाइट बंद
- बिहार के चार जिलों से चल रहा चारधाम ठगी रैकेट
- फर्जी हेली टिकट और होटल बुकिंग से श्रद्धालु बन रहे शिकार
- STF का ऑपरेशन प्रहार तेज, साइबर अपराधियों पर कसा शिकंजा
देहरादून: चारधाम यात्रा के बढ़ते उत्साह के बीच साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। केदारनाथ हेली सेवा, होटल बुकिंग और यात्रा पंजीकरण के नाम पर श्रद्धालुओं से ऑनलाइन ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उत्तराखंड एसटीएफ की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि इस साइबर नेटवर्क का संचालन मुख्य रूप से बिहार के नवादा, पटना, गया और बिहारशरीफ जिलों से किया जा रहा है। जांच एजेंसियों को सबसे अधिक फर्जी आईपी एड्रेस और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियां इन्हीं जिलों से जुड़ी मिली हैं।
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार चारधाम यात्रा शुरू होते ही साइबर अपराधियों ने सोशल मीडिया, फर्जी वेबसाइटों और नकली मोबाइल नंबरों के जरिए श्रद्धालुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। सबसे अधिक शिकायतें केदारनाथ हेली सेवा की ऑनलाइन टिकट बुकिंग को लेकर सामने आई हैं। ठग श्रद्धालुओं को कम कीमत में तत्काल टिकट दिलाने का लालच देकर ऑनलाइन भुगतान करवाते थे और रकम मिलते ही संपर्क तोड़ देते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई गिरोह फर्जी होटल और गेस्ट हाउस बुकिंग के नाम पर भी यात्रियों से हजारों रुपये ऐंठ रहे थे। ये अपराधी सोशल मीडिया पर सरकारी पोर्टल जैसी दिखने वाली वेबसाइटों का प्रचार करते थे, जिससे श्रद्धालु आसानी से भ्रमित हो जाते थे। कई वेबसाइटों का डिजाइन इतना वास्तविक बनाया गया था कि आम लोग उन्हें असली सरकारी पोर्टल समझ बैठते थे।
उत्तराखंड एसटीएफ ने अब तक कार्रवाई करते हुए 200 से अधिक फर्जी वेबसाइट, फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम अकाउंट और ऑनलाइन बुकिंग लिंक बंद कराए हैं। इसके साथ ही 50 से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबर भी ब्लॉक किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहे थे और डिजिटल विज्ञापनों के जरिए देशभर के श्रद्धालुओं तक पहुंच बना रहे थे।
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। साइबर टीमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, संदिग्ध ट्रैवल पोर्टल और ऑनलाइन पेमेंट गतिविधियों पर विशेष नजर रख रही हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग बिना जांच-पड़ताल के सोशल मीडिया लिंक या व्हाट्सएप नंबरों के जरिए भुगतान कर देते हैं, जिससे वे ठगी का शिकार बन जाते हैं।
एसएसपी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि हेली सेवा, होटल या यात्रा पंजीकरण केवल अधिकृत पोर्टल से ही कराएं। केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग के लिए केवल IRCTC अधिकृत है। किसी भी अनजान मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया पोस्ट या व्हाट्सएप लिंक पर भरोसा न करें और भुगतान करने से पहले वेबसाइट की सत्यता अवश्य जांच लें।
उन्होंने कहा कि यदि किसी श्रद्धालु के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। एसटीएफ की “ऑपरेशन प्रहार” मुहिम के तहत पिछले चार महीनों में पीड़ितों के लगभग 10 करोड़ रुपये बचाए गए हैं। साथ ही 147 अंतरराज्यीय लिंक ऑपरेटरों और 27 फर्जी मोबाइल धारकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी की गई है।





