
उत्तराखंड में श्रम संहिताओं के लागू होने से लाखों श्रमिकों को बड़ी राहत मिलने वाली है, जिसमें एक साल में ग्रेच्युटी, PF और बीमा जैसी सुविधाएं शामिल हैं। असंगठित क्षेत्र और गिग वर्कर्स को भी पहली बार सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा जाएगा। साथ ही सालाना स्वास्थ्य जांच और समय पर डिजिटल वेतन भुगतान की व्यवस्था भी लागू की जाएगी।
- श्रम संहिताएं लागू होने से बदलेगा मजदूरों का भविष्य
- गिग वर्कर्स को भी मिलेगा PF और बीमा का लाभ
- महिला श्रमिकों को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति
- सालाना मेडिकल चेकअप और डिजिटल वेतन भुगतान की तैयारी
देहरादून: उत्तराखंड में श्रमिकों के हित में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार की चार श्रम संहिताओं को राज्य में अपनाने के बाद अब इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। श्रम विभाग नियमावली को अंतिम रूप देने में जुटा है, जिसके लागू होते ही राज्य के लाखों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मिलने लगेंगी।
नई व्यवस्था के तहत सबसे बड़ा बदलाव ग्रेच्युटी को लेकर होगा। अब तक श्रमिकों को पांच साल की सेवा पूरी करने के बाद ही ग्रेच्युटी मिलती थी, लेकिन नई नियमावली लागू होने के बाद अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों को मात्र एक साल की सेवा के बाद भी यह लाभ मिल सकेगा। इससे अस्थायी और कॉन्ट्रैक्ट आधारित कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
इसके अलावा पहली बार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और गिग वर्कर्स—जैसे डिलीवरी बॉय और राइडिंग पार्टनर—को भी भविष्य निधि (PF) और बीमा जैसी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण के माध्यम से इन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।
नई श्रम संहिताओं में वेतन प्रणाली को भी पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है। श्रमिकों का वेतन समय पर और डिजिटल माध्यम से भुगतान किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि मूल वेतन कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत हो, जिससे PF और ग्रेच्युटी की राशि में स्वतः बढ़ोतरी होगी।
महिला श्रमिकों के लिए भी नई सुविधाएं प्रस्तावित हैं। अब वे अपनी सहमति से रात की शिफ्ट में काम कर सकेंगी, बशर्ते नियोक्ता उनकी सुरक्षा और घर तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाए। इसके अलावा 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी संभव हो सकेगी।
श्रम विभाग के अनुसार, विभिन्न संहिताओं की नियमावली का ड्राफ्ट जारी कर सुझाव मांगे जा चुके हैं और जल्द ही इन्हें कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। नियम लागू होते ही राज्य में श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों का दायरा व्यापक हो जाएगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आने की उम्मीद है।




