
उत्तराखंड में कांग्रेस 2027 चुनाव की तैयारी में जुटी है, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर कमजोरी साफ दिख रही है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल बिना पूरी टीम के चुनावी मोर्चा संभाल रहे हैं, जिससे रणनीति को धार नहीं मिल पा रही। नई कार्यकारिणी के गठन में देरी के कारण पार्टी की सक्रियता प्रभावित हो रही है।
- 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन कमजोर, गोदियाल पर बढ़ा दबाव
- बिना टीम कप्तानी कर रहे गोदियाल, रणनीति को नहीं मिल रही धार
- उत्तराखंड कांग्रेस में संगठनात्मक सुस्ती, कार्यकारिणी गठन में देरी
- सत्ता वापसी की राह में अड़चन, कांग्रेस को टीम गठन का इंतजार
देहरादून: उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस भले ही सत्ता में वापसी के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत में पार्टी संगठनात्मक स्तर पर कमजोर नजर आ रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल इस समय चुनावी मोर्चे पर बिना मजबूत टीम के कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं, जिससे पार्टी की रणनीति को अपेक्षित धार नहीं मिल पा रही है। पिछले करीब छह महीनों से प्रदेश कांग्रेस बिना पूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी (पीसीसी) के काम कर रही है।
संगठन के भीतर नई जिम्मेदारियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिससे कार्यकर्ताओं में भी उत्साह की कमी देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी चुनाव में सफलता के लिए मजबूत और सक्रिय टीम जरूरी होती है, लेकिन वर्तमान में कांग्रेस इस मोर्चे पर पिछड़ती दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि पार्टी हाईकमान ने नवंबर 2025 में गणेश गोदियाल को दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। इससे पहले वह जुलाई 2021 से अप्रैल 2022 तक भी इस पद पर रह चुके हैं। हालांकि, उनके पहले प्रदेश अध्यक्ष रहे करण माहरा भी नई टीम के गठन में असफल रहे थे, और अब गोदियाल भी उसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के लिए नामों की सूची हाईकमान को भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। जब तक नई टीम का गठन नहीं होता, तब तक पुरानी कार्यकारिणी ही कामकाज संभाल रही है, जिससे संगठनात्मक गतिविधियों में अपेक्षित तेजी नहीं आ पा रही। इस बीच पार्टी ने चुनावी तैयारियों को गति देने के लिए कुछ कदम जरूर उठाए हैं। वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत को चुनाव अभियान और प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही जिला और ब्लॉक स्तर पर अध्यक्षों की नियुक्ति भी की जा चुकी है।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि पार्टी के सभी नेता 2027 में कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और जल्द ही नई पीसीसी का गठन कर संगठन को मजबूत किया जाएगा। हालांकि, जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक पार्टी की चुनावी रणनीति अधूरी ही नजर आ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस को 2027 में सत्ता में वापसी करनी है, तो उसे जल्द से जल्द संगठन को मजबूत करते हुए एक स्पष्ट और आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरना होगा, वरना मजबूत नेतृत्व के बावजूद बिना टीम के जीत हासिल करना मुश्किल साबित हो सकता है।





