
यह पुस्तक समीक्षा बिहार से प्रकाशित ‘सुमन सागर’ त्रैमासिक पत्रिका के नवीनतम अंक पर आधारित है। इसमें साहित्य, समाज, संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिक विषयों पर विविध रचनाओं के माध्यम से पाठकों को ज्ञानवर्धक सामग्री प्रस्तुत की गई है।
- सुमन सागर: साहित्यिक रचनाओं का समृद्ध मंच
- विविध विषयों से सजी पठनीय त्रैमासिक पत्रिका
- साहित्यकारों को मंच देती ‘सुमन सागर’
- ज्ञान और रचनात्मकता का संगम – सुमन सागर
बाढ़ (बिहार) से प्रकाशित सुमन सागर त्रैमासिक पत्रिका वर्तमान समय में पाठकों के लिए एक पठनीय पत्रिका है। चौबीस पृष्ठों में संपादक मंडल ने सामाजिक, आध्यात्मिक, धर्म, दर्शन, इतिहास, साहित्य और संस्कृति का समावेश किया है तथा देश के विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों को सुमन सागर त्रैमासिक पत्रिका में स्थान देकर साहित्यकारों की कलम का सम्मान किया है। साथ ही कलमकारों को इस पत्रिका के माध्यम से साहित्यिक मंच प्रदान किया है, जो कलमकारों के लिए गर्व व गौरव की बात है।
यह पत्रिका वर्ष 2000 से नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है और 12 मार्च 2026 को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से पाठकों तक पहुँची है। चौबीस पृष्ठों की इस पुस्तक में व्यंग्य, आलेख, कविता, गीत, गजल, लघुकथा सहित अनेक विधाओं पर पाठकों को रोचक व ज्ञानवर्धक सामग्री परोसी गई है। अप्रैल-मई-जून 2026 के इस नवीनतम अंक में बढ़ती का नाम दाढ़ी, रिश्तों की उम्र, परवरिश जीवन का आईना, पर्व पर गर्व, मस्ती से कुट्टी, नई सुबह, दहेज, नाता जैसी ढेरों रचनाएं प्रकाशित हुई हैं, जो पाठकों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होंगी।
जोधपुर के साहित्यकार सुनील कुमार माथुर का आलेख रिश्तों की उम्र व चेतन चौहान का आलेख हम्पी खंडहरों में बिखरा है शिल्प सौंदर्य शीर्षक पत्रिका के मुखपृष्ठ पर सुर्खियां बने हैं। इस अंक की अतिथि संपादक डॉ. प्रेमलता यदु हैं, जिन्होंने अपनी कलम के माध्यम से कहा है कि “साहित्य से समाज है।” उनका लिखा संपादकीय काफी चिंतन-मनन योग्य व सारगर्भित है। पत्रिका का गेटअप और मेकअप काफी अच्छा है तथा छपाई भी सुंदर है।
पुस्तक समीक्षा : सुमन सागर (त्रैमासिक पत्रिका)
प्रकाशक — श्याम बिहारी आलोक
विनीता भवन, सवेरा सिनेमा चौक, काजीचक, बाढ़ — 803213 (बिहार)
सम्पादक — संजीव आलोक
पृष्ठ — 24
मूल्य — एक प्रति 50 रुपए
समीक्षक — सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच एवं
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार
33, वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुंआ, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान।








Nice Article
धन्यवाद
Good patrika
धन्यवाद