
रानीखेत में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। चिकित्सालय में प्रतिदिन 50–60 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे होम्योपैथी के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है। अस्पताल में आवश्यक दवाएं निशुल्क उपलब्ध होने से आमजन को विशेष लाभ मिल रहा है।
- रानीखेत के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में व्यवस्थाओं की पड़ताल
- प्रतिदिन 50–60 मरीज ले रहे उपचार, होम्योपैथी की बढ़ी लोकप्रियता
- संजय पाण्डे ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता पर दिया जोर
- निशुल्क दवाओं से आमजन को राहत, अस्पताल की सेवाएं सराही गईं
अल्मोड़ा | अल्मोड़ा के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने जनसेवा को प्राथमिकता देते हुए रानीखेत स्थित गोविन्द सिंह माहरा राजकीय नागरिक चिकित्सालय परिसर में संचालित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं, पारदर्शिता और सेवा गुणवत्ता की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान ओपीडी पंजीकरण व्यवस्था, औषधियों की उपलब्धता, प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या तथा उपचार प्रणाली की विस्तृत जानकारी ली गई।
चिकित्सालय में तैनात डॉ. आनंद ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 50 से 60 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि क्षेत्र में होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जनता का विश्वास निरंतर बढ़ रहा है। डॉ. आनंद ने यह भी जानकारी दी कि चिकित्सालय में वर्तमान समय में लगभग सभी आवश्यक होम्योपैथिक औषधियां उपलब्ध हैं। सरकारी व्यवस्था के अंतर्गत ये दवाएं पूर्णतः निशुल्क प्रदान की जा रही हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को विशेष राहत मिल रही है।
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होम्योपैथिक दवाएं सामान्यतः दुष्प्रभाव रहित मानी जाती हैं, जिससे मरीजों में इस पद्धति के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो रहा है। संजय पाण्डे ने कहा कि सुदृढ़ और संवेदनशील स्वास्थ्य व्यवस्था ही समाज की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब सरकारी संस्थान नियमितता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करते हैं, तो जनता का विश्वास स्वतः मजबूत होता है।
उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की सेवाओं का अधिकाधिक लाभ उठाएं और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि जनस्वास्थ्य संस्थानों की समय-समय पर समीक्षा और जनसहभागिता से सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।






