
ऊधमसिंह नगर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में सरकार ने उच्चस्तरीय SIT का गठन किया है। मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश देते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों का तबादला भी किया गया है।
- सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में 12 पुलिसकर्मियों का तबादला
- सुसाइड नोट और वीडियो के आधार पर होगी विस्तृत विवेचना
- IG STF की अध्यक्षता में बनी पांच सदस्यीय SIT
- किसान ने आत्महत्या से पहले लगाए थे पुलिस पर भ्रष्टाचार के आरोप
देहरादून। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इसकी जांच के लिए आईजी एसटीएफ की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है और पूरे मामले की गहन एवं निष्पक्ष विवेचना के निर्देश दिए हैं।
यह दर्दनाक घटना 11 जनवरी को सामने आई थी, जब ऊधमसिंह नगर के आईटीआई थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पैगा निवासी 40 वर्षीय किसान सुखवंत सिंह ने गौलापार स्थित देवभूमि होटल के कमरा नंबर 101 में अपनी कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद जब सुसाइड नोट, वीडियो और ई-मेल सामने आए, तो मामले ने और भी गंभीर रूप ले लिया। मृतक ने अपने संदेशों में कुछ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलीभगत कर भ्रष्टाचार करने के गंभीर आरोप लगाए थे।
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सरकार ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 पुलिस कर्मियों को तत्काल प्रभाव से गढ़वाल रेंज के जनपद चमोली और रुद्रप्रयाग स्थानांतरित कर दिया है। इसके साथ ही मृतक द्वारा जारी किए गए वीडियो और ई-मेल में उल्लेखित तथ्यों की विस्तार से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके। गठित की गई पांच सदस्यीय एसआईटी की अध्यक्षता पुलिस महानिरीक्षक (IG) एसटीएफ नीलेश आनन्द भरणे कर रहे हैं।
इस टीम में पुलिस अधीक्षक चम्पावत अजय गणपति, क्षेत्राधिकारी टनकपुर वंदना वर्मा, निरीक्षक दिवान सिंह बिष्ट (चम्पावत) और उपनिरीक्षक मनीष खत्री (चम्पावत) को शामिल किया गया है। टीम को सभी पहलुओं से मामले की जांच करने और शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। परिजनों के अनुसार, सुखवंत सिंह ने प्रॉपर्टी डीलरों के साथ साढ़े तीन करोड़ रुपये में भूमि का सौदा किया था, लेकिन कथित तौर पर उन्हें केवल 50 लाख रुपये मूल्य की दूसरी भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई।
आरोप है कि इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही और शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी मानसिक दबाव और कथित अन्याय के चलते सुखवंत सिंह ने यह आत्मघाती कदम उठाया। इस मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और यदि कोई भी दोषी पाया गया तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार के इस कदम से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं यह मामला प्रदेश में किसानों की समस्याओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।





