
पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय, अल्मोड़ा में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार सुदृढ़ हो रही हैं। ईएनटी विभाग द्वारा कान के पर्दे का जटिल ऑपरेशन और बच्चे की जान बचाने जैसी घटनाएं अस्पताल की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती हैं। अब जिला चिकित्सालय अल्मोड़ा जटिल उपचारों के लिए एक भरोसेमंद केंद्र बनता जा रहा है।
- जिला चिकित्सालय अल्मोड़ा में ईएनटी विभाग की बड़ी सफलता
- कान के पर्दे का जटिल ऑपरेशन अब अल्मोड़ा में ही संभव
- डॉक्टरों की प्रतिबद्धता से मजबूत हो रहा जिला स्वास्थ्य तंत्र
- बच्चे की जान बचाने में जिला अस्पताल की त्वरित कार्रवाई
- अब बड़े शहरों पर निर्भर नहीं अल्मोड़ा के मरीज
अल्मोड़ा। पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय, अल्मोड़ा अब केवल सामान्य उपचार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की बदौलत जटिल रोगों के सफल इलाज का मजबूत केंद्र बनता जा रहा है। जिले के लोगों को अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करने की मजबूरी नहीं रह गई है। यह बदलाव अस्पताल प्रशासन की प्रतिबद्धता, चिकित्सकों की मेहनत और आधुनिक तकनीकों की उपलब्धता का प्रत्यक्ष परिणाम है।
जिला चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सक अपने-अपने विभागों में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, समयबद्ध उपचार और नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग कर डॉक्टर आमजन का विश्वास लगातार मजबूत कर रहे हैं। इसका सीधा लाभ पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को मिल रहा है।
इसी क्रम में अस्पताल के ईएनटी विभाग ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जागेश्वर क्षेत्र के 18 वर्षीय युवक, जो पिछले लगभग छह वर्षों से कान के पर्दे की गंभीर समस्या से पीड़ित था, का सफल ऑपरेशन जिला चिकित्सालय में ही किया गया। यह जटिल सर्जरी दूरबीन (माइक्रोस्कोपिक) विधि से की गई, जिसे ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मोनिका सम्मल ने सफलता पूर्वक अंजाम दिया। ऑपरेशन के बाद युवक की स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है।
इस सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब कान, नाक और गले से संबंधित जटिल शल्यक्रियाओं के लिए मरीजों को हल्द्वानी, बरेली या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि मरीजों को मानसिक राहत भी मिलेगी। इसके अतिरिक्त, इसी दिन एक और सराहनीय चिकित्सकीय कार्य सामने आया। एक छोटे बच्चे की नाक में जोंक फंस जाने से उसकी स्थिति गंभीर हो गई थी। समय रहते डॉ. मोनिका सम्मल ने सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई करते हुए जोंक को सुरक्षित रूप से निकाल दिया, जिससे बच्चे की जान बच गई। इस घटना के बाद परिजनों ने चिकित्सक और अस्पताल प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने जिला चिकित्सालय की प्रगति पर खुशी जताते हुए कहा कि यह अल्मोड़ा वासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अस्पताल में कार्यरत काबिल और अनुभवी डॉक्टर जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि ऐसे समर्पित चिकित्सकों को शीघ्र ही सम्मानित किया जाएगा, ताकि उनका मनोबल और अधिक बढ़े और वे इसी उत्साह से सेवाएं देते रहें।
इन घटनाओं से यह साफ संकेत मिलता है कि जिला चिकित्सालय अल्मोड़ा अब केवल रेफर सेंटर नहीं रह गया है। यहां जटिल से जटिल मामलों का सफल इलाज संभव हो रहा है। उन्नत होती चिकित्सा सुविधाएं, समर्पित चिकित्सक और जनसेवा की भावना—यही बदलते अल्मोड़ा और सशक्त होते स्वास्थ्य तंत्र की पहचान बन रही है।





