
अरावली पर्वत श्रृंखला पर बढ़ती मानवीय गतिविधियों से इसका अस्तित्व खतरे में है, जिससे हिमालय, दिल्ली और पश्चिमी यूपी का पर्यावरण संतुलन प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों ने वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसे उपायों से इसके संरक्षण पर जोर दिया है।
- अरावली पर बढ़ता मानवीय दबाव, पर्यावरण संतुलन पर मंडराता खतरा
- अरावली कमजोर पड़ी तो बदलेगा उत्तर भारत का जलवायु चक्र
- प्राचीन अरावली पर्वत श्रृंखला संरक्षण की बाट जोह रही
- विशेषज्ञों की चेतावनी: अरावली का क्षरण भविष्य के लिए गंभीर खतरा
अल्मोड़ा। पृथ्वी की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल अरावली आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। खनन, अंधाधुंध निर्माण और अन्य मानवीय गतिविधियों ने इस प्राकृतिक धरोहर को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि समय रहते अरावली का संरक्षण नहीं किया गया, तो इसके दुष्परिणाम हिमालय से लेकर दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक महसूस किए जाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि एक जीवंत प्राकृतिक प्रणाली है। भूगर्भशास्त्री और जिओमाफोर्लोजिस्ट प्रो. जे.एस. रावत का कहना है कि अरावली अपनी जीवन-यात्रा के वृद्धावस्था चरण में है और इस अवस्था में इसे विशेष देखभाल की आवश्यकता है। उन्होंने इसकी तुलना एक बुजुर्ग से करते हुए कहा कि देखभाल के बजाय इसके साथ लगातार क्रूरता की जा रही है।
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प्रो. रावत ने स्पष्ट किया कि अरावली हिमालय, दिल्ली और पश्चिमी यूपी के लिए एक प्राकृतिक प्रहरी का काम करती है। यह पर्वत श्रृंखला न केवल जलवायु संतुलन बनाए रखने में सहायक है, बल्कि भूजल पुनर्भरण, वर्षा चक्र और जैव विविधता संरक्षण में भी इसकी अहम भूमिका है। यदि अरावली कमजोर होती है, तो क्षेत्र में जल संकट, तापमान वृद्धि और पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली के संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जैविक उपचार और यांत्रिक उपायों को व्यापक स्तर पर लागू करना आवश्यक है। इसके साथ ही जनभागीदारी और सरकारी स्तर पर ठोस नीति निर्माण की भी जरूरत है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ‘जल ही जीवन है’ के सिद्धांत को यदि आज नहीं समझा गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर और अपूरणीय परिणाम भुगतने पड़ेंगे। अरावली का संरक्षण केवल पर्यावरण का सवाल नहीं, बल्कि मानव भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।





