
🌟🌟🌟
ट्रम्प के ‘गोल्ड कार्ड’ लॉन्च कार्यक्रम के दौरान भारतीय प्रतिभाओं पर दिए गए बयान के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने रणनीतिक संबंधों की प्रगति, व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
- रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा, दोनों नेताओं ने सहयोग बढ़ाने पर जताई सहमति
- महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में और विस्तार की तैयारी
- ट्रम्प ने कहा—भारत जैसे देशों के प्रतिभाशाली छात्र अमेरिका के लिए ‘उपहार’
- गोल्ड कार्ड: 10 लाख डॉलर का नया वीजा प्रोग्राम, कंपनियों को विदेशी टैलेंट बनाए रखने की अनुमति
नई दिल्ली। अमेरिका में ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’ वीजा प्रोग्राम लॉन्च के दौरान भारतीय छात्रों और पेशेवरों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति से फोन पर विस्तृत वार्ता की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और सभी प्रमुख क्षेत्रों में हुए प्रगति को संतोषजनक बताया। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने द्विपक्षीय व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा, रक्षा एवं सुरक्षा, और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को और गति देने पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने माना कि भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट—जिसका उद्देश्य सैन्य साझेदारी को मजबूत करना, तेज वाणिज्यिक अवसर पैदा करना और तकनीक आधारित सहयोग को बढ़ाना है—21वीं सदी की रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए केंद्रीय महत्व रखता है। टेलीफोन वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने एशिया, मध्य-पूर्व और दुनिया के अन्य क्षेत्रों में बदलते भू-राजनीतिक हालात पर भी विचार-विमर्श किया। साझा सुरक्षा चुनौतियों, वैश्विक स्थिरता और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। बातचीत सकारात्मक रही और दोनों नेताओं ने आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति दी।
ट्रम्प का ‘गोल्ड कार्ड’ बयान — भारतीयों पर बड़ी टिप्पणी
फोन कॉल से पहले व्हाइट हाउस में आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप ने औपचारिक रूप से ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’ लॉन्च किया। यह 10 लाख डॉलर का एक नया वीजा प्रोग्राम है, जो उच्च कौशल वाले विदेशी नागरिकों—विशेषकर अमेरिकन यूनिवर्सिटी से स्नातक हुए प्रतिभावान छात्रों—को अमेरिका में बनाए रखने का अवसर देता है। ट्रम्प ने कहा कि किसी महान व्यक्ति का अमेरिका आना ‘‘एक उपहार’’ जैसा है, लेकिन यह ‘‘शर्मनाक’’ है कि ऐसे प्रतिभाशाली छात्र पढ़ाई पूरी होने के बाद भारत, चीन या फ्रांस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि गोल्ड कार्ड प्रोग्राम का उद्देश्य ऐसी प्रतिभाओं को स्थायी रूप से अमेरिका में बनाए रखना है। ट्रम्प की यह टिप्पणी विशेष रूप से भारतीय छात्रों और पेशेवरों को लेकर थी, जो अमेरिका के टेक सेक्टर में बड़ी संख्या में योगदान देते हैं। गोल्ड कार्ड वेबसाइट भी लॉंच कर दी गई है, जिससे कंपनियां व्हार्टन, हार्वर्ड, एमआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों से प्रतिभा को सीधे अमेरिका में बनाए रखने के लिए आवेदन कर सकती हैं।
भारतीय मूल के टेक दिग्गज भी मौजूद
कार्यक्रम में भारतीय मूल के आईबीएम सीईओ अरविंद कृष्णा और डेल टेक्नोलॉजीज के सीईओ माइकल डेल भी उपस्थित थे, जिन्हें अमेरिकी टेक सेक्टर में भारतीय समुदाय के प्रभाव और योगदान के प्रमुख प्रतीक माना जाता है। ट्रम्प के इस बयान और कार्यक्रम के तुरंत बाद मोदी और ट्रंप की फोन वार्ता ने यह संकेत दिया कि भारत-अमेरिका संबंधों में रणनीतिक संवाद लगातार सक्रिय है और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच दोनों देश अपने सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।








