
- धान के स्थान पर मक्का व मूंग उगाने को तैयार किसान, बशर्ते बिक्री सुनिश्चित हो
- मंडी समिति की बैठक में किसानों–व्यापारियों ने उठाई खरीद और भंडारण की समस्या
- वैज्ञानिकों ने बताया—ग्रीष्मकाल में धान का विकल्प बन सकता है मक्का
- औद्योगिक इकाइयों से उचित मूल्य का आश्वासन मिले तो व्यापारी खरीद को तैयार
- धान की गर्मी वाली फसल लगाने पर होगी कानूनी कार्रवाई: मुख्य कृषि अधिकारी
काशीपुर | काशीपुर के कृषि उत्पादन मंडी समिति सभागार में शनिवार को एक महत्त्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के किसानों, आढ़तियों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने ग्रीष्मकालीन खेती के विकल्पों तथा फसल परिवर्तन की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक की अध्यक्षता मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. विकेश कुमार सिंह यादव ने की। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि गर्मी के मौसम में धान के स्थान पर मक्का और मूंग जैसी फसलों की खेती न केवल जल संरक्षण के लिए लाभकारी है, बल्कि बढ़ते पर्यावरणीय दबाव को देखते हुए यह समय की मांग भी है।
बैठक के दौरान केवीके विशेषज्ञ डॉ. शिव शर्मा और डॉ. प्रतिभा सिंह ने किसानों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गर्मियों में धान की फसल अत्यधिक पानी मांगती है, जबकि मक्का और मूंग जैसी फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में बेहतर उत्पादन दे सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मक्का की खेती से जुड़ी कुछ समस्याएं—विशेषकर खरीद, परिवहन और भंडारण—किसानों को रोकती हैं।
किसानों ने बैठक में खुलकर कहा कि उन्हें धान के विकल्प के रूप में मक्का उगाने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंता इसकी बिक्री व्यवस्था को लेकर है। किसान प्रतिनिधियों ने बताया कि उनके पास मक्का को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए न तो उचित भंडारण संरचना है और न ही सुखाने की सुविधाएं। इसलिए यदि सरकार या मंडी समिति बिक्री की गारंटी सुनिश्चित करे तो वे बड़े पैमाने पर इस फसल को अपनाने को तैयार हैं।
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व्यापारी प्रतिनिधिमंडल ने भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि बाजार में मक्का की खरीद तभी संभव होगी जब औद्योगिक इकाइयों की ओर से उचित कीमत पर क्रय का स्पष्ट आश्वासन प्राप्त हो। अन्यथा व्यापारियों के लिए बड़ी मात्रा में मक्का खरीदकर रखना एक जोखिम भरा सौदा है। इस संबंध में मुख्य कृषि अधिकारी ने उद्योगों से समन्वय स्थापित कर समाधान खोजने का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान मुख्य कृषि अधिकारी ने यह भी कहा कि गर्मियों में धान की खेती प्रतिबंधित है, और जो किसान इसकी अवहेलना करेंगे, उनके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जल संकट और लगातार बदलते जलवायु परिदृश्यों को देखते हुए फसल प्रणाली में परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी काशीपुर डॉ. कल्याण सिंह, सचिव मंडी समिति योगेश तिवारी, अनाज व्यापारी पराग अग्रवाल तथा कई प्रमुख किसान प्रतिनिधि—कुलविंदर सिंह, बलकार सिंह आदि—मौजूद रहे। सभी ने मिलकर यह स्वीकार किया कि यदि मक्का की खरीद सुनिश्चित की जाए तो यह फसल क्षेत्र के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकती है और किसानों की आमदनी में भी वृद्धि संभव है।
🎉फसल परिवर्तन पर प्रमुख बातें 🎉
- किसान धान के स्थान पर मक्का–मूंग उगाने को तैयार
- बिक्री व भंडारण व्यवस्था न होना सबसे बड़ी समस्या
- व्यापारी तभी खरीदेंगे जब उद्योग उचित मूल्य देंगे
- गर्मी में धान की खेती पर रोक, उल्लंघन पर कार्रवाई
- कृषि वैज्ञानिकों ने मक्का को व्यवहारिक विकल्प बताया





