
मुंबई। भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता को और अधिक मजबूत करते हुए उथले पानी में पनडुब्बी रोधी कार्रवाई के लिए तैयार किए गए आधुनिक युद्धपोत आईएनएस माहे को सोमवार को औपचारिक रूप से नौसेना बेड़े में शामिल किया गया। मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में आयोजित इस भव्य समारोह में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईएनएस माहे को कमीशन किया और इसे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित माहे-श्रेणी का यह पहला एंटी-सबमरीन वॉरफेयर—शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है। यह उस नई पीढ़ी के आधुनिक और तेज़ युद्धक जहाजों में से है जिन्हें भारतीय जलक्षेत्र की निगरानी, तटीय रक्षा, समुद्री गश्त और पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है। इस वर्ग के कुल आठ जहाजों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें माहे सबसे पहला है जो अब आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना का हिस्सा बन गया है।
कमीशनिंग समारोह के दौरान जनरल द्विवेदी ने जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि आईएनएस माहे स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा, “यह जहाज न केवल हमारी समुद्री युद्ध प्रणाली को नई शक्ति देगा बल्कि यह इस बात का भी प्रतीक है कि भारत जटिल युद्धपोतों को स्वयं डिजाइन और निर्माण करने में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भारतीय नौसेना के लगभग 75 प्रतिशत पूंजीगत प्लेटफॉर्म पूरी तरह स्वदेशी हैं—चाहे वे आधुनिक युद्धपोत हों, पनडुब्बियाँ हों, या उच्च क्षमता वाले सोनार और हथियार प्रणाली। आईएनएस माहे में 80 प्रतिशत से अधिक सामग्री भी भारत में ही निर्मित है, जिससे यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजबूत उदाहरण बन जाता है।
ऐतिहासिक तटीय शहर माहे के नाम पर रखा गया यह युद्धपोत गति, चपलता और अत्याधुनिक तकनीक का अनोखा मेल है। इसे ‘साइलेंट हंटर’ भी कहा जा रहा है, क्योंकि यह दुश्मन की पनडुब्बियों और संदिग्ध समुद्री गतिविधियों को बेहद नजदीकी उथले जलक्षेत्रों में तेजी और गोपनीयता से पकड़ सकता है। पश्चिमी समुद्री सीमा पर इसकी तैनाती से भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
इस अवसर पर जनरल द्विवेदी ने जहाज का निरीक्षण भी किया और नौसेना अधिकारियों से इसकी युद्धक क्षमता, तकनीकी विशेषताओं और ऑपरेशनल आवश्यकताओं पर विस्तृत जानकारी ली। समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने की, जिन्होंने इस उपलब्धि को देश की समुद्री सुरक्षा क्षमता में बड़ा कदम बताया।
आईएनएस माहे का शामिल होना उन प्रयासों का हिस्सा है जिनके ज़रिये भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपना समुद्री प्रभुत्व मजबूत कर रहा है। चीन-पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में लगातार बदलावों के बीच यह युद्धक जहाज भारतीय समुद्री सीमाओं को सुरक्षित रखने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा। आईएनएस माहे अब भारतीय नौसेना के उन आधुनिक प्लेटफॉर्म में शामिल हो चुका है जो आने वाले वर्षों में देश की समुद्री रणनीति का आधार बनेंगे और दुश्मन की हर पनडुब्बी गतिविधि को मात देने में सक्षम होंगे।







