डॉ उषाकिरण श्रीवास्तव, मुजफ्फरपुर, बिहार

होली आई होली आई
खुशियां भर के झोली लाई,
एक दूजे को अबीर लगाते
समरसता का भाव जगाते।
मन भावन पकवान हैं खाते
मिल-जुलकर सब होली गाते,
बड़ों के पांव गुलाल चढ़ाते
बुजुर्गो का आशीष पाते।
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होली है त्योहार खुशी का
नाचों गाओ ख़ुशी मनाओ,
एक दूजे को गले लगाओ
पुआ और दही बाडा खाओ।

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