
विश्व पर्यावरण सप्ताह के तहत पिथौरागढ़ में यक्षवती नदी पुनर्जीवन और वृहद पौधरोपण अभियान का आयोजन किया गया। सेना, अर्धसैनिक बलों, एनसीसी कैडेट्स, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने नदी सफाई अभियान में भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। देवकटिया क्षेत्र में 1000 पौधों का रोपण किया गया, जबकि अगले चरण में चंडाक क्षेत्र में भी एक हजार पौधे लगाए जाएंगे।
- पर्यावरण संरक्षण के लिए सेना, अर्धसैनिक बल और छात्रों ने मिलाया हाथ
- यक्षवती नदी की सफाई और पुनर्जीवन को चला विशेष अभियान
- विश्व पर्यावरण सप्ताह पर पिथौरागढ़ में हरित पहल को मिली गति
- देवकटिया में वृक्षारोपण, चंडाक में कल फिर लगाए जाएंगे एक हजार पौधे
पिथौरागढ़। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” के अंतर्गत आयोजित विश्व पर्यावरण सप्ताह के कार्यक्रमों ने पिथौरागढ़ जिले में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को नई ऊर्जा प्रदान की है। 130 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) ईको कुमाऊँ के नेतृत्व में आयोजित यक्षवती नदी पुनर्जीवन अभियान एवं वृहद पौधरोपण कार्यक्रम में सेना, अर्धसैनिक बलों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता का परिचय दिया। विश्व पर्यावरण सप्ताह के तहत आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य केवल स्वच्छता और पौधरोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करना भी था। कार्यक्रम में सैन्य और नागरिक समाज के बीच समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला।
यक्षवती नदी के रई बगड़ क्षेत्र में आयोजित पुनर्जीवन एवं स्वच्छता अभियान में 130 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) ईको कुमाऊँ, 12 कुमाऊँ रेजिमेंट, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), एनसीसी कैडेट्स तथा जनरल बी.सी. जोशी आर्मी पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अभियान के दौरान नदी तटों, जलधारा के किनारों तथा आसपास के क्षेत्रों में फैले प्लास्टिक, पॉलीथीन और अन्य ठोस अपशिष्ट पदार्थों को एकत्र कर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया गया। प्रतिभागियों ने श्रमदान करते हुए नदी क्षेत्र की व्यापक सफाई की और लोगों को जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश दिया। यक्षवती नदी पिथौरागढ़ नगर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जल स्रोत मानी जाती है। यह नदी वर्षों से स्थानीय आबादी के साथ-साथ विभिन्न सैन्य प्रतिष्ठानों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति करती रही है।
हालांकि बीते वर्षों में बढ़ते शहरीकरण, प्रदूषण और मानवीय हस्तक्षेप के कारण नदी के प्राकृतिक स्वरूप और जल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे में यह पुनर्जीवन अभियान नदी के संरक्षण और उसके दीर्घकालिक अस्तित्व को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। अभियान के दौरान विशेषज्ञों और अधिकारियों ने प्रतिभागियों को जल स्रोतों के संरक्षण, जल प्रदूषण के दुष्प्रभावों और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों और युवाओं को विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया ताकि वे भविष्य में भी ऐसे अभियानों का हिस्सा बन सकें और समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित कर सकें। इसी क्रम में देवकटिया क्षेत्र में 130 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) ईको कुमाऊँ के नेतृत्व में 348 मीडियम रेजिमेंट और 14वीं बटालियन आईटीबीपी के सहयोग से वृहद पौधरोपण अभियान भी संचालित किया गया।
अभियान के दौरान विभिन्न प्रजातियों के एक हजार पौधे रोपे गए। पौधरोपण कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाना, मृदा अपरदन को रोकना, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना तथा स्थानीय जैव विविधता को मजबूत बनाना था। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं की रोकथाम का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। अधिक हरित आवरण से भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती है, भूक्षरण कम होता है और स्थानीय जल स्रोतों का संरक्षण संभव हो पाता है। इसी दृष्टिकोण से इस अभियान को दीर्घकालिक पर्यावरणीय निवेश के रूप में देखा जा रहा है। 130 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) ईको कुमाऊँ के सहायक कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल वी.एस. दानू ने बताया कि बटालियन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण गतिविधियों में लगातार अग्रणी भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि बटालियन द्वारा नियमित रूप से वृक्षारोपण, जल स्रोत संरक्षण, मृदा संरक्षण तथा पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विश्व पर्यावरण सप्ताह के दौरान आयोजित ये गतिविधियां पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने का संकल्प लिया। उन्होंने जल स्रोतों को स्वच्छ रखने, अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का वचन लिया। स्थानीय नागरिकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश भी दिया कि यदि समाज के सभी वर्ग मिलकर प्रयास करें तो प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सतत विकास दोनों संभव हैं।
विश्व पर्यावरण सप्ताह के अंतर्गत अभियान का अगला चरण भी निर्धारित किया गया है। इसके तहत चंडाक परिक्षेत्र में नगर निगम मेयर, जिला प्रशासन के अधिकारियों, स्थानीय नागरिकों और स्कूली बच्चों की सहभागिता से एक हजार और पौधों का रोपण किया जाएगा। इस कार्यक्रम से जिले में हरित क्षेत्र विस्तार के प्रयासों को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है। यक्षवती नदी पुनर्जीवन और वृहद पौधरोपण अभियान ने पिथौरागढ़ में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया है। यह पहल न केवल नदी और हरित संपदा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रेरक उदाहरण भी बन रही है।







