
देहरादून में महिला आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं। सरकार जहां नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। एक दिन के इस सत्र में हंगामे के साथ राजनीतिक टकराव की पूरी संभावना जताई जा रही है।
- महिला आरक्षण पर गरमाएगा सदन, सरकार लाएगी निंदा प्रस्ताव
- विशेष सत्र में महिला अधिकारों पर बहस, विपक्ष करेगा घेराव
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा आज, सदन में तीखी नोकझोंक संभव
- विधानसभा में महिला आरक्षण पर हाई वोल्टेज ड्रामा तय
देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में महिला आरक्षण के मुद्दे पर मंगलवार को विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसे लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सुबह 11 बजे शुरू होने वाले इस सत्र में ‘नारी सम्मान और लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर चर्चा होगी। सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के पूरे आसार हैं।
सरकार की ओर से केंद्र द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में प्रस्ताव रखा जाएगा। साथ ही, इस विधेयक पर संसद में विपक्ष के रुख को लेकर निंदा प्रस्ताव भी लाने की तैयारी है। सत्ता पक्ष के विधायक महिला आरक्षण को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए इसका समर्थन करेंगे और विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाएंगे।
वहीं, विपक्ष ने इस विशेष सत्र को सरकार को घेरने का अवसर माना है। विपक्षी दल महिला सुरक्षा, अधिकार और वास्तविक सशक्तिकरण के मुद्दों को उठाने की रणनीति बना चुके हैं। विपक्ष की मांग है कि 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को जल्द लागू करने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाए।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि संसदीय कार्य मंत्री ने इसे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखते हुए चर्चा में भाग लेने की अपील की है, लेकिन जिस तरह दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार की है, उससे साफ है कि सत्र के दौरान तीखी नोकझोंक और हंगामे से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक दिन के इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर होने वाली बहस न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





