
ओम प्रकाश उनियाल
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव परिणाम आने ही वाला है। 10 मार्च को मतगणना होनी है। ज्यों-ज्यों मतगणना का दिन नजदीक आ रहा है त्यों-त्यों प्रत्याशियों के दिलों की धड़कने भी बढ़ती जा रही हैं। मतदान होने की तारीख से हरेक प्रत्याशी मतों के आकलन में व्यस्त रहा।
हरेक अपने स्तर से अपनी जीत का दावा ठोकता आया। गल्ली-मौहल्लों, चाय की दुकानों पर प्रत्याशियों के समर्थक भी जोड़-घटा पर माथापच्ची, बहसबाजी और चर्चा करते नजर आए। लेकिन अब प्रत्याशियों की बैचेनी बढ़ती जा रही है और जुबां पर खामोशी।
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जबकि, हर प्रत्याशी को तकरीबन अनुमान होता ही है कि वह कितने पानी में है? लेकिन कभी तुक्का भी लग जाता है। जिसे भाग्य पलटना कहते हैं। पिछले चुनाव में मोदी लहर की हवा थी तो बहती गंगा में जिसने भी हाथ धोए ज्यादातर का बेड़ापार हो ही गया था।
इस बार कुछ रुझान अलग ही नजर आ रहा है। हालांकि, कुछ जनता पर भी निर्भर करता है। कई बार जनता की भेड़ चाल निकम्मे प्रत्याशी को माननीय बना डालती है। जिन्हें अपनी जीत का शत-प्रतिशत विश्वास होता है वे भी अति आत्मविश्वास के कारण मार खा जाते हैं।
चुनावी हवा है न जाने किस तरफ अपना रुख कर डाले। ‘एक्जिट पोल’ की ड्योंडी पीटने वालों के आंकड़े भी अक्सर धराशायी हो जाते हैं। खैर, इंतजार खत्म होने वाला ही है। देखना है किसे-किसे मतदाताओं ने सिर-आंखों पर बिठाया है।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »ओम प्रकाश उनियाललेखक एवं स्वतंत्र पत्रकारAddress »कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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