
उत्तराखंड खेल विभाग के पोर्टल और ऐप का संचालन करने वाली कंपनी पर बिना विभागीय अनुमति यूजर आईडी, पासवर्ड और एक्सेस बदलने का आरोप है, जिससे विभाग की कई योजनाएं प्रभावित हुई हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी के पास साढ़े तीन लाख से अधिक खिलाड़ियों का डाटा मौजूद है, इसलिए इसके चोरी होने या दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है। विभाग ने कंपनी को काम के लिए करीब 80 फीसदी भुगतान कर दिया था, जबकि बाकी भुगतान हैंडओवर के बाद होना था; इसी बीच पोर्टल की पहुंच बदलने से विभाग में चिंता बढ़ गई है।
- खेल विभाग की वेबसाइट और पोर्टल पर संकट, 3.50 लाख खिलाड़ियों का डाटा कंपनी के पास
- बिना अनुमति बदले पोर्टल के क्रेडेंशियल, खिलाड़ियों के डाटा के दुरुपयोग की आशंका
- सीएम चैंपियंस ट्रॉफी के 3.50 लाख आवेदकों का डाटा भी खतरे में होने की आशंका
- 80 फीसदी भुगतान के बाद भी पोर्टल का हैंडओवर नहीं, कंपनी की कार्रवाई से विभाग चिंतित
देहरादून। उत्तराखंड के खेल विभाग के लिए पोर्टल और ऐप विकसित करने वाली कंपनी की एक कार्रवाई ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि कंपनी ने विभाग की अनुमति के बिना पोर्टल और वेबसाइट के यूजर आईडी, पासवर्ड और एक्सेस बदल दिए, जिससे विभाग की अपने ही पोर्टल तक पहुंच प्रभावित हो गई है। सबसे बड़ी चिंता खिलाड़ियों के डाटा को लेकर है। बताया जा रहा है कि इस समय कंपनी के पास साढ़े तीन लाख से अधिक खिलाड़ियों का डाटा मौजूद है। ऐसे में इस डाटा के चोरी होने और उसके बाद दुरुपयोग किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।
राष्ट्रीय खेलों के दौरान कंपनी को मिला था काम
खेल विभाग ने राष्ट्रीय खेलों के समय खेब टेक स्ट्राटेजी प्राइवेट लिमिटेड को पोर्टल और ऐप विकसित करने तथा उसके संचालन का काम दिया था। योजना के अनुसार तैयार किए गए पोर्टल और ऐप को बाद में आईटीडीए के सर्वर पर अपलोड किया जाना था। लेकिन पोर्टल को आईटीडीए के सर्वर पर अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कंपनी की ओर से यूजर आईडी और पासवर्ड आदि बदल दिए गए। इससे विभाग की ओर से पोर्टल और उसके संचालन तक पहुंच को लेकर स्थिति जटिल हो गई है।
साढ़े तीन लाख से ज्यादा खिलाड़ियों का डाटा
मामले में सबसे अहम पहलू खिलाड़ियों के डाटा से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि कंपनी के पास वर्तमान में 3.50 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों की जानकारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक सितंबर को सीएम चैंपियंस ट्रॉफी का उद्घाटन किया था। इस योजना के तहत करीब 3.50 लाख खिलाड़ियों ने आवेदन किया था। ऐसे में इस योजना से संबंधित बड़ी संख्या में खिलाड़ियों का डाटा पोर्टल पर दर्ज हुआ है। यही वजह है कि पोर्टल की पहुंच बदलने के बाद खिलाड़ियों के डाटा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल डाटा चोरी की पुष्टि नहीं हुई है और इसे लेकर आशंका जताई जा रही है।
उदीयमान खिलाड़ी छात्रवृत्ति योजना का डाटा भी कंपनी के पास
बताया जा रहा है कि कंपनी के पास केवल सीएम चैंपियंस ट्रॉफी से संबंधित डाटा ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन खेल छात्रवृत्ति योजना से जुड़ा डाटा भी मौजूद है। इस योजना के तहत पिछले वर्ष करीब 3900 खिलाड़ियों को लगभग 11.25 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई थी। इस वर्ष भी योजना के लिए नए सिरे से खिलाड़ियों का डाटा पोर्टल पर दर्ज किया गया था। ऐसे में इस डाटा की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभागीय स्तर पर यह चिंता जताई जा रही है कि यदि पोर्टल और डाटा पर विभाग का नियंत्रण प्रभावित रहता है तो खिलाड़ियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी की सुरक्षा चुनौती बन सकती है।
बिना अनुमति क्रेडेंशियल बदलने पर सवाल
पोर्टल और ऐप को आईटीडीए के सर्वर पर अपलोड किया जाना था। इसके लिए विभाग और कंपनी के बीच हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन इससे पहले ही कंपनी की ओर से पोर्टल के क्रेडेंशियल बदले जाने की बात सामने आई है। विभागीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब पोर्टल और ऐप का काम विभाग के लिए किया गया था तो बिना विभाग की अनुमति यूजर आईडी, पासवर्ड और एक्सेस में बदलाव क्यों किया गया।
कंपनी को 80 फीसदी तक भुगतान
मामले में भुगतान को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण है। विभाग ने कंपनी को उसके काम के लिए करीब 80 फीसदी तक भुगतान कर दिया था। विभागीय सूत्रों के अनुसार शेष भुगतान पोर्टल और ऐप की हैंडओवर प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाना था। लेकिन हैंडओवर से पहले ही कंपनी की ओर से पोर्टल की पहुंच बदलने की बात सामने आई है। इससे विभाग में चिंता का माहौल है और पोर्टल तथा डाटा पर नियंत्रण को लेकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
विभाग की योजनाएं प्रभावित
पोर्टल और ऐप की यूजर आईडी तथा पासवर्ड बदलने से खेल विभाग की कई योजनाओं का काम प्रभावित होने की बात सामने आई है। पोर्टल पर खिलाड़ियों से संबंधित डाटा और योजनाओं की प्रक्रिया संचालित होने के कारण विभाग के लिए इसकी पहुंच महत्वपूर्ण है। यदि विभागीय अधिकारियों के पास पोर्टल की आवश्यक पहुंच नहीं रहती है तो योजनाओं से संबंधित कामकाज, डाटा सत्यापन और आगे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
डाटा चोरी की आशंका, पुष्टि का इंतजार
खिलाड़ियों की बड़ी संख्या से संबंधित डाटा कंपनी के पास होने के कारण डाटा चोरी या दुरुपयोग की आशंका ने मामले को गंभीर बना दिया है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी में डाटा चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस पूरे मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि पोर्टल पर मौजूद खिलाड़ियों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं और कंपनी की ओर से बदले गए क्रेडेंशियल के पीछे क्या कारण था।
मेघालय राष्ट्रीय खेलों का भी मिला ठेका
बताया जा रहा है कि इसी कंपनी ने अब मेघालय में होने वाले राष्ट्रीय खेलों के लिए भी पोर्टल और ऐप विकसित करने का ठेका हासिल किया है। उत्तराखंड में कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच इस जानकारी ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि मेघालय में मिले ठेके से संबंधित विस्तृत जानकारी इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
हैंडओवर प्रक्रिया पर टिकी नजर
फिलहाल खेल विभाग के सामने पोर्टल और ऐप का नियंत्रण दोबारा अपने हाथ में लेने तथा खिलाड़ियों के डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है। कंपनी को किए गए भुगतान, हैंडओवर की स्थिति और बिना अनुमति क्रेडेंशियल बदलने के कारणों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू साढ़े तीन लाख से अधिक खिलाड़ियों के डाटा की सुरक्षा का है। यदि जांच में डाटा से छेड़छाड़, चोरी या दुरुपयोग का कोई तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल मामला विभागीय चिंता और डाटा सुरक्षा की आशंका के स्तर पर है।





