
सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में झूठी गवाही देने और जांच को प्रभावित करने के आरोप में ऊंज पुलिस ने 31 नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी शपथपत्र तैयार कर पुलिस अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए गए और इन्हीं के आधार पर मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई। थाने से न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पीड़िता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके आदेश के बाद पुलिस ने मंगलवार को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
- कोर्ट के आदेश पर 31 लोगों के खिलाफ एफआईआर, जांच प्रभावित करने का आरोप
- सामूहिक दुष्कर्म केस में फर्जी शपथपत्र का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
- थाने से न्याय नहीं मिला तो कोर्ट पहुंची पीड़िता, 31 पर मुकदमा
- भदोही में सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच पर उठे सवाल, 31 लोगों पर एफआईआर
भदोही। जिले में सामूहिक दुष्कर्म के एक पुराने मामले की जांच को प्रभावित करने और कथित तौर पर झूठी गवाही व फर्जी शपथपत्र का सहारा लेने के आरोप में ऊंज पुलिस ने 31 नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद की गई है। पीड़िता का आरोप है कि वर्ष 2020 में उसके साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी शपथपत्र तैयार किए गए थे। उसका यह भी आरोप है कि इन शपथपत्रों को पुलिस अधिकारियों के सामने प्रस्तुत कर जांच की दिशा प्रभावित करने का प्रयास किया गया। थाने स्तर पर न्याय नहीं मिलने की बात कहते हुए पीड़िता ने न्यायालय का रुख किया। अदालत के आदेश के बाद ऊंज पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
वर्ष 2020 में दर्ज कराया था मुकदमा
ऊंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि वह अनुसूचित जाति से है और मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती है। महिला के अनुसार, फूलचंद और मनोज कुमार से उसकी पुरानी रंजिश चल रही है। पीड़िता का आरोप है कि करीब छह साल पहले वर्ष 2020 में मनोज कुमार, अरविंद और उसके एक सहयोगी ने घर में घुसकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। आरोप है कि घटना के बाद आरोपियों ने उसे शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़िता के अनुसार, घटना के बाद उसने वर्ष 2020 में ऊंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले की विवेचना शुरू हुई।
विवेचना पर लगाए गंभीर आरोप
पीड़िता ने अपनी शिकायत में विवेचना अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि आरोपियों के प्रभाव में आकर विवेचना अधिकारी ने मामले में मनगढ़ंत कहानी तैयार की। पीड़िता के मुताबिक, मामले में झूठे तथ्यों के आधार पर कथित रूप से फर्जी शपथपत्र तैयार किए गए। आरोप है कि इन शपथपत्रों का इस्तेमाल आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया में अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। महिला का यह भी आरोप है कि उसका बयान लिए बिना और शपथपत्रों में दिए गए तथ्यों एवं साक्ष्यों की समुचित जांच किए बिना ही मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई।
न्यायालय की शरण में पहुंची पीड़िता
थाना स्तर पर कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होने के बाद पीड़िता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद न्यायालय में उसका बयान दर्ज किया गया और मामले की दोबारा विवेचना का रास्ता खुला। पीड़िता का आरोप है कि दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी आरोपियों ने तत्कालीन अधिकारियों से राय-मशविरा कर कथित रूप से बिना हस्ताक्षर और अधिवक्ता की पहचान वाले शपथपत्र तैयार कराए।
30 अक्तूबर 2021 को अधिकारियों को दिए गए थे शपथपत्र
शिकायत के अनुसार, कथित फर्जी शपथपत्र 30 अक्तूबर 2021 को पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी ज्ञानपुर के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। पीड़िता का आरोप है कि इन शपथपत्रों की समुचित जांच-पड़ताल किए बिना ही आरोपियों के पक्ष में रिपोर्ट तैयार कर दी गई। उसका आरोप है कि विवेचना अधिकारी ने कथित फर्जी शपथपत्रों का पर्याप्त परीक्षण किए बिना ही मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी। अब अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने इन आरोपों को लेकर अलग से प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
31 नामजद समेत अन्य पर मुकदमा
कोर्ट के आदेश के बाद जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उनमें राजपति बिंद, रामकिशुन बिंद, मुनायक सरोज, संतोष कुमार, शिवनायक सरोज, नीरज, सूरज, दीपक, नंदलाल, प्रमोद सरोज, प्रदीप, अर्जुन, संत लाल, अमरनाथ, फूलचंद और मनोज कुमार शामिल हैं। इसके अलावा नेंबू लाल, जब्बार, असगर अली निवासी पूरेविश्वनाथ, ऊंज, पवन कुमार निवासी गोपालापुर, कालकानगर, कोईरौना, ओमप्रकाश सिंह, बबलू यादव, राजेश कुमार विश्वकर्मा, राममोहन यादव निवासी शिवाजीनगर, प्रयागराज, राजू पटेल निवासी बाबा बाग, अल्लापुर, प्रयागराज, छोटू और कमलेश कुमार ठाकुर निवासी बागंबरी गद्दी, अल्लापुर, प्रयागराज, गौरव सिंह निवासी चरैया प्रतापगढ़, बलराम निवासी बक्शी खुर्द, दारानगर, प्रयागराज, अजय कुमार निवासी अल्लापुर और रिंकू कन्नौजिया निवासी कच्ची सड़क, दारागंजनगर के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने नामजद लोगों के अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी मुकदमे में शामिल किया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस करेगी पूरे मामले की जांच
पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के अनुसार, न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक ने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी विवेचना अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच में सामने आएंगे तथ्य
फिलहाल प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने मुख्य चुनौती कथित शपथपत्रों की वास्तविकता, उन्हें तैयार कराने वाले लोगों और मामले की पूर्व विवेचना में उनकी भूमिका की जांच करना है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है, उनकी कथित भूमिका क्या रही और दस्तावेज पुलिस अधिकारियों के समक्ष किस प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किए गए। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।








