
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर उत्तराखंड में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई शिक्षकों की कार्यस्थल से 50 से 60 किलोमीटर दूर और कुछ मामलों में एक ही शिक्षक की दो से तीन स्थानों पर ड्यूटी लगाए जाने के आरोप लगे हैं। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने इसे अव्यवहारिक बताते हुए समस्या का समाधान न होने पर आंदोलन और सचिवालय कूच की चेतावनी दी है।
- 60 किलोमीटर दूर ड्यूटी से शिक्षक परेशान, संघ ने उठाए सवाल
- गर्मी की छुट्टियों में ड्यूटी लगाने पर बढ़ा शिक्षकों का असंतोष
- एक शिक्षिका को तीन स्थानों पर तैनाती, प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
- शिक्षक संघ बोला- समाधान नहीं हुआ तो होगा सचिवालय कूच
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के लिए शिक्षकों की लगाई गई ड्यूटी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिक्षकों और शिक्षक संगठनों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा ड्यूटी निर्धारण में गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं, जिसके कारण कई शिक्षकों को भारी असुविधा और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कुछ शिक्षकों की ड्यूटी उनके कार्यस्थल से 50 से 60 किलोमीटर दूर लगा दी गई है, जबकि कुछ मामलों में एक ही शिक्षक को दो से तीन अलग-अलग स्थानों पर तैनात कर दिया गया है। इस व्यवस्था को लेकर शिक्षकों में गहरा असंतोष व्याप्त है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे प्रशासनिक अव्यवस्था का उदाहरण बताया है।
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा ने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों की एसआईआर अभियान में ड्यूटी लगा दी गई है। शिक्षकों को सरकारी दायित्वों का निर्वहन करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ड्यूटी निर्धारण में तार्किकता और व्यवहारिकता का अभाव गंभीर समस्या बन गया है। संघ के अनुसार अनेक शिक्षकों को उनके कार्यस्थल और निवास स्थान से काफी दूर क्षेत्रों में भेजा गया है। पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए 50 से 60 किलोमीटर की दूरी तय करना भी कई बार कठिन हो जाता है। ऐसे में शिक्षकों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय, संसाधन और ऊर्जा की अतिरिक्त खपत होगी। गर्मी के मौसम में यह परेशानी और अधिक बढ़ जाती है।
सबसे गंभीर मामला एक शिक्षिका से जुड़ा बताया जा रहा है, जिनकी ड्यूटी एक साथ तीन अलग-अलग स्थानों पर लगा दी गई है। जानकारी के अनुसार उक्त शिक्षिका को धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के दीपनगर में बीएलओ के साथ कार्य करने के लिए नियुक्त किया गया है। इसके अलावा उनकी ड्यूटी धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में ही एक अन्य स्थान तथा कैंट विधानसभा क्षेत्र में भी लगाई गई है। ऐसे में उनके सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वह एक ही समय में तीन अलग-अलग स्थानों पर अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाएं। शिक्षक संघ का कहना है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। कई अन्य शिक्षक और शिक्षिकाएं भी इसी प्रकार की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कुछ कर्मचारियों की ड्यूटी अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ निर्धारित कर दी गई है, जबकि कुछ के नाम सूची से हटाए गए हैं और कुछ के नाम बिना स्पष्ट कारण के जोड़े गए हैं। इससे ड्यूटी सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि देहरादून तहसील कार्यालय स्तर पर ड्यूटी निर्धारण के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई है। उनका कहना है कि सूची तैयार करते समय पर्याप्त जांच-पड़ताल नहीं की गई, जिसके कारण अनेक विसंगतियां सामने आई हैं। शिक्षकों का दावा है कि यदि समय रहते इन त्रुटियों को नहीं सुधारा गया तो एसआईआर अभियान के संचालन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने इस पूरे मामले को शिक्षकों के उत्पीड़न से जोड़ते हुए प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है। संघ का कहना है कि शिक्षक पहले से ही शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में अव्यवस्थित तरीके से ड्यूटी लगाना उनके अधिकारों और कार्य परिस्थितियों के साथ न्याय नहीं है।
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ड्यूटी निर्धारण में सुधार नहीं किया गया तो शिक्षक आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने बताया कि आठ जून को प्रस्तावित सचिवालय कूच के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। शिक्षक संगठन सरकार और प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखेगा तथा दोषपूर्ण ड्यूटी आवंटन को तत्काल संशोधित करने की मांग करेगा। उधर प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि शिक्षकों की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए माना जा रहा है कि संबंधित अधिकारी ड्यूटी सूची की समीक्षा कर सकते हैं। फिलहाल एसआईआर अभियान शुरू होने से पहले ड्यूटी आवंटन को लेकर उत्पन्न यह विवाद शिक्षा विभाग और प्रशासन दोनों के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।





