
देहरादून में उत्तराखंड सरकार पंचायतीराज व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत क्षेत्र पंचायतों में बीडीओ की जगह एडीओ पंचायत को सचिव बनाया जाएगा, जिससे पंचायत कार्यों की निगरानी, जवाबदेही और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार जल्द ही इस संबंध में कैबिनेट में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है।
- पंचायतों को मजबूत बनाने की तैयारी, सरकार लाएगी नया संशोधन
- क्षेत्र पंचायतों में प्रशासनिक बदलाव की तैयारी तेज
- पंचायत कार्यों की निगरानी सुधारने को सरकार का बड़ा फैसला
- कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव, पंचायत व्यवस्था में बढ़ेगी जवाबदेही
देहरादून। उत्तराखंड सरकार पंचायतीराज व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सक्रिय बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने जा रही है। सरकार पंचायत राज एक्ट-2016 में संशोधन की तैयारी कर रही है, जिसके तहत अब क्षेत्र पंचायतों में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) की जगह सहायक विकास अधिकारी पंचायत (एडीओ पंचायत) को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस संबंध में जल्द ही राज्य कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।
पंचायतीराज विभाग का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में बीडीओ पर कई प्रशासनिक और विकास कार्यों का अतिरिक्त दबाव रहता है। एक ही अधिकारी के पास अनेक विभागीय जिम्मेदारियां होने के कारण पंचायतों से जुड़े कार्यों की निगरानी प्रभावित होती है। कई बार योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और स्थानीय समस्याओं के समाधान में भी बाधाएं सामने आती हैं। ऐसे में सरकार अब पंचायतों की कार्यप्रणाली को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव करने जा रही है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार क्षेत्र पंचायतों में सचिव की जिम्मेदारी एडीओ पंचायत को दी जाएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एडीओ पंचायत सीधे तौर पर पंचायत व्यवस्था और ग्रामीण विकास योजनाओं से जुड़े रहते हैं। ऐसे में उनके पास पंचायतों की समस्याओं, योजनाओं और स्थानीय जरूरतों की बेहतर जानकारी होती है। इससे विकास कार्यों की निगरानी मजबूत होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। साथ ही पंचायतों को मिलने वाली सरकारी धनराशि का उपयोग भी अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ किया जा सकेगा। पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से भी लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि पंचायत कार्यों के लिए अलग और समर्पित प्रशासनिक व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रदेश में वर्तमान में 95 विकासखंड हैं, जहां बीडीओ क्षेत्र पंचायतों के सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। वहीं 95 सहायक विकास अधिकारी पंचायत के पद सृजित हैं, जिनमें से 88 पदों पर अधिकारी कार्यरत हैं और सात पद रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश में 1175 ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीडीओ) के पदों में से 1078 पद भरे हुए हैं, जबकि 97 पद अभी भी खाली हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड को छोड़कर देश के अधिकांश राज्यों में पहले से ही एडीओ पंचायत क्षेत्र पंचायत सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। इसी व्यवस्था को देखते हुए उत्तराखंड में भी यह बदलाव लागू करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतीराज संस्थाओं को अधिक अधिकार और प्रशासनिक मजबूती मिलेगी।
पंचायतीराज मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि पंचायतों को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की मांग और पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता को देखते हुए सरकार जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव पेश करेगी।





