परिक्रमा : बिहार का प्रमुख नगर ‘गया’

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राजीव कुमार झा

हमारे देश के प्रमुख शहरों में गया का नाम भी लिया जा सकता है .यह एक प्राचीन नगर है और पौराणिक ग्रंथों में इससे जुड़ी कथाएं पढ़ने को मिलती है . गया बिहार के मगध प्रमंडल का मुख्यालय भी है और यह नगर फल्गु नदी के किनारे स्थित है. बंगाल से अलग होने के बाद बिहार जब राज्य बना तो गया को जिला का दर्जा प्रदान किया गया और इस शहर में आधुनिक व्यवस्था के अनुसार सड़कें , अस्पताल और मैदान-बाजार बनाये गये.

यहां का गांधी मैदान सार्वजनिक और सामुदायिक कार्यक्रमों , गतिविधियों का सबसे बड़ा केन्द्र है. हिन्दू मतावलंबी यहां प्रतिवर्ष पितृपक्ष के दौरान अपने पितरों का पिंडदान करते हैं और इस मौके पर यहां देश – विदेश से काफी तादाद में लोगों का आगमन होता है.कोरोना के कारण पिछले कुछ सालों से कोरोना के कारण गया में पितृपक्ष के मेले को स्थगित कर दिया गया था लेकिन इस साल फ़िर से पितृपक्ष के दौरान इस मेले के आयोजन की संभावना व्यक्त की जा रही है.

गया वर्तमान समय में आधुनिक शिक्षा का प्रमुख केन्द्र हैऔर‌ यहां उच्च स्तर के कई स्कूल कालेज स्थित हैं.कुछ साल पहले गया में दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना से यहां इस दिशा में और भी प्रगति हुई है. गया शुरू से व्यापार व्यवसाय का केन्द्र रहा है और इस शहर के आसपास के गांवों में धान की खूब खेती होती है. इस शहर के आसपास के सैकड़ों छोटे शहरों और कस्बों के बाजार में गया के बाजार से विभिन्न प्रकार के वस्तु ओं की आपूर्ति होती है . कपड़े, बर्तन विभिन्न प्रकार के घरेलू उपस्कर , औषधि और इंजिनियरिंग के सामानों के अलावा यहां तमाम तरह के नये वाहनों की दुकानें स्थित हैं.

यहां मिठाई का कारोबार भी होता है .यहां का मेडिकल कालेज और इंजिनियरिंग कालेज भी काफी पुराना है . गया कालेज बिहार का प्रतिष्ठित कालेज माना जाता है . गया एक पारंपरिक जीवन संस्कृति का नगर है और यहां के लोगों की भाषा उनके बोलचाल आपसी व्यवहार पर इसका गहरा असर देखा जा सकता है. यहां काफी संख्या में मुसलमान भी रहते हैं. यहां पत्थरों की मूर्तियां भी बनाई जाती हैं और कई शताब्दी पहले राजस्थान से यहां पर पत्थर की मूर्तियों को बनाने वाले कारीगरों का आगमन हुआ था .

इस शहर के सराय रोड में काफी समय से देह व्यापार का धंधा करने वाले समुदाय के लोग भी रहते हैं और इस पर पाबंदी लगाने की कोशिश भी यहां की जा रही है . इस दौरान काफी कोठों को बंद कराया गया है. इससे धंधे में शामिल काफी वेश्या ओं को विस्थापन कि संकट भी झेलना पड़ा है . इसके बावजूद गया में काफी बड़े – बड़े कोठे आज भी देखे जा सकते हैं . गया का मगही पान अपने लाजवाब स्वाद के लिए प्रसिद्ध है.

यहां इस शहर से थोड़ी दूर तिलैया में मगही पान की खेती होती है. गया का अनरसा भी प्रसिद्ध है.यह चावल के आटे और खोया घी से बनी स्वादिष्ट मिठाई होती है. यहां के टेकारी रोड में अनरसे की दुकानें स्थित हैं. गया का विष्णुपद मंदिर और मंगलागौरी मंदिर हिंदुओं के पावन धर्मस्थल हैं. इंदौर की महारानी अहिल्याबाई के द्वारा निर्मित विष्णुपद मंदिर बिहार का सबसे सुंदर मंदिर माना जाता है. यह काले ग्रेनाइट पत्थर से बना भव्य मंदिर है . मंगलागौरी मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है . विष्णु और पार्वती के इन दोनों ही मंदिरों में प्रति दिन हजारों लोग पूजा अर्चना के लिए आते हैं.


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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राजीव कुमार झा

कवि एवं लेखक

Address »
इंदुपुर, पोस्ट बड़हिया, जिला लखीसराय (बिहार) | Mob : 6206756085

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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