राष्ट्र का गौरव और अद्वितीय वक्ता ‘स्वामी विवेकानंद’

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सुनील कुमार माथुर

स्वामी विवेकानंद राष्ट्र का गौरव थे जिन्होंने व्यवहारिक वेदांत को प्रतिपादित किया । वे अद्वितीय वक्ता थे जिसके बलबूते सम्पूर्ण विश्व ने उनको गुरु मान लिया । स्वामी विवेकानंद का हिन्दू धर्म को पुर्नस्थापित करने में सक्रिय योगदान रहा । उनका व्यक्तित्व प्रभावी रहा । वे देशभक्त साधु थे जिन्होंने सक्रिय राजनीति से दूर रहकर एकता व अखंडता के सिध्दान्त को प्रतिपादित किया ।

उनके मुख से निकलने वाली वाणी में मस्तिष्क व हृदय से निकले भावों की अभिव्यक्ति होती थी तथा वे चमत्कृत वक्ता के रूप में पूरे विश्व को प्रभावित करने में सफल रहे । वे सुधार विरोधी नहीं थे । वे अतीत के अनुभवों को वर्तमान के परिप्रेक्ष्य के अनुसार ढालकर भविष्य की परिकल्पना करने वालों में से थे ।

उन्होंने महिलाओं व पीछडे वर्ग को शिक्षित करने तथा उनके उत्थान के लिए सतत् प्रयास किये । रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर तथा महिलाओं को संयास का अधिकार दिलाकर प्रगतिवादी विचारों को लागू किया । 19 वीं सदी में स्वामी विवेकानंद के रूप में एक सूर्योदय हुआ था उन्होंने जो स्वप्न देखा था वो भारत का सपना था ।

उनकी वाणी का उद्घोष शिकागो में हुआ जिससे भारत की छवि सूर्य की तरह आलोकित हुई । मानव सभ्यता को स्वामी विवेकानंद की वाणी को आत्मसात् करना चाहिए । भारत वर्ष की ओजस्विता व तेजस्विता का दूसरा रूप स्वामी विवेकानंद है ।

उनका नाम मन में उमंग पैदा करता है । वे सभ्यता के सबसे बडे प्रतीक थे । करूणा व सहृदयता का दूसरा नाम स्वामी विवेकानंद है । विवेकानन्द के सिद्धान्तों को जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है तभी जीवन सफल व सार्थक होगा ।

स्वामी विवेकानंद युवाओं को देश सेवा व सामाजिक परिवर्तन की लङाई में आगे करना चाहते थे । अपने प्रवचनों के माध्यम से उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए राष्ट्र के लिए आगे आने का आव्हान किया । भारत में विवेकानंद के जन्म दिन 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है ।

वही समूचा विश्व उन्हें अपना आदर्श मानता हैं । आज युवाओं को बचपन से ही देश प्रेम व आपसी प्रेम भावना से जोडे जाने की आवश्यकता है । समाज में फैल रही नफरत व युवाओं में बढ रही नशे की प्रवृति को कम करने की दिशा में भी प्रयास किये जाने की जरूरत है । वही बच्चों व युवाओं में स्वामी विवेकानंद के साहित्य को पहुंचाने की आवश्यकता है ।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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सुनील कुमार माथुर

लेखक एवं कवि

Address »
33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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