कानपुर के स्वरूपनगर क्षेत्र में साइबर ठगों ने 65 वर्षीय डॉक्टर को टेलीकॉम अधिकारी और फिर सीबीआई व मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। फर्जी दस्तावेज और गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगों ने डॉक्टर से आरटीजीएस के जरिए 48 लाख 20 हजार 500 रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए। ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जबकि पुलिस ने समय रहते एक और रकम ट्रांसफर होने से रोक दी।
- फर्जी CBI अफसर बनकर डॉक्टर को डराया, 48 लाख ठगे
- डिजिटल अरेस्ट का डर, डॉक्टर से 48.20 लाख की ठगी
- इंटरपोल-सीबीआई के फर्जी दस्तावेज भेजकर डॉक्टर से ठगी
- तीन दिन कमरे में कैद रखा, फिर खाते से निकलवा लिए लाखों रुपये
कानपुर। साइबर ठगों ने कानपुर के स्वरूपनगर क्षेत्र में रहने वाले 65 वर्षीय डॉक्टर को तीन दिन तक कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट रखकर 48 लाख 20 हजार 500 रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को टेलीकॉम विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताया और डॉक्टर के नाम से मुंबई में आपराधिक गतिविधियां होने की बात कहकर उन्हें डराया। इसके बाद इंटरपोल और सीबीआई से जुड़े फर्जी दस्तावेज भेजकर डॉक्टर को गंभीर जांच में फंसे होने का विश्वास दिलाया गया।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित डॉक्टर योगेश चंद्र मिश्रा स्वरूपनगर स्थित शयनिका अपार्टमेंट में रहते हैं। उन्होंने साइबर थाने में दर्ज शिकायत में बताया कि 10 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया।
कॉलर ने दावा किया कि डॉक्टर के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मुंबई के तिलकनगर क्षेत्र में धमकी भरी कॉल, अश्लील सामग्री और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया गया है। कॉलर ने यह भी कहा कि उक्त नंबर के खिलाफ मुंबई में प्राथमिकी दर्ज है।
इंटरपोल और सीबीआई के फर्जी दस्तावेज भेजे
कॉलर ने अपना नाम रवि शर्मा और एक कोड आईडी बताई। इसके बाद डॉक्टर के व्हाट्सऐप पर कई दस्तावेज भेजे गए। इनमें इंटरपोल और सीबीआई से संबंधित बताए गए दस्तावेज भी शामिल थे। इन दस्तावेजों और सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर ठगों ने डॉक्टर को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वह किसी गंभीर आपराधिक जांच में फंस चुके हैं।
इसके बाद कॉल कथित तौर पर अन्य लोगों को ट्रांसफर की गई। इन लोगों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताया। डॉक्टर पर गंभीर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी गई। लगातार धमकियों के कारण डॉक्टर डर गए और ठगों के निर्देशों का पालन करने लगे।
तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखने का दावा
ठगों ने डॉक्टर की उम्र अधिक होने का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें घर से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ में शामिल होना होगा। इसी बहाने उन्हें तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगों के निर्देशों के मुताबिक रहने के लिए मजबूर किया गया।
उन्हें कमरे से बाहर न निकलने और किसी परिजन या अन्य व्यक्ति से घटना के बारे में बातचीत न करने की हिदायत दी गई। गिरफ्तारी के डर और लगातार पूछताछ के दबाव में डॉक्टर ने परिवार के सदस्यों से भी इस बारे में जानकारी साझा नहीं की।
आरबीआई खाते के नाम पर 48.20 लाख ट्रांसफर
ठगों ने डॉक्टर से कहा कि जांच के उद्देश्य से उन्हें अपने बैंक खाते की रकम उनके बताए खाते में आरटीजीएस करनी होगी। रकम को कथित तौर पर आरबीआई खाते में जमा कराने और जांच पूरी होने के बाद 24 से 72 घंटे में वापस करने का झांसा दिया गया।
ठगों की बातों पर विश्वास करके डॉक्टर ने अपने एसबीआई स्वरूपनगर खाते से 48,20,500 रुपये उनके बताए बैंक ऑफ इंडिया खाते में आरटीजीएस कर दिए। रकम ट्रांसफर होने के बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बेटी और दामाद से भी नहीं बताया
डिजिटल अरेस्ट और गिरफ्तारी की धमकियों के कारण डॉक्टर इस कदर डर गए थे कि उन्होंने अपार्टमेंट की छठी मंजिल पर रहने वाली अपनी बेटी और दामाद को भी घटना के बारे में नहीं बताया।
साइबर इंस्पेक्टर अभय सिंह के अनुसार, पीड़ित की तहरीर पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आईटी एक्ट और जालसाजी से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों तथा बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, साइबर ठग डॉक्टर से और रकम भी ऐंठने की तैयारी में थे। डॉक्टर बैंक जाकर दोबारा रकम ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन समय रहते बैंक अधिकारियों को सूचना दे दी गई और संभावित लेनदेन को रोकने की कार्रवाई की गई।
ऐसे बचें डिजिटल अरेस्ट की ठगी से
पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, फोन या वीडियो कॉल पर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, इंटरपोल, बैंक या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाए और पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहे तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
ऐसी स्थिति में परिवार या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को तत्काल जानकारी दें। यदि रकम ट्रांसफर हो चुकी है तो बिना देरी 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें और संबंधित बैंक को भी तत्काल सूचना दें। मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप चैट, स्क्रीनशॉट, कॉल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार हो सकता है।

