
डोईवाला के कांसरो वन रेंज के झबरावाला गांव में हाथी के हमले में 55 वर्षीय ग्रामीण जमील की मौत हो गई। शुक्रवार रात हाथीकुंड क्षेत्र के पास स्कूटी से घर लौटते समय हाथी अचानक सामने आ गया, जिसके बाद भागने के दौरान जमील उसकी चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों ने क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती आवाजाही पर चिंता जताते हुए वन विभाग से आबादी क्षेत्र में हाथियों के प्रवेश को रोकने के प्रभावी उपाय और मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
- डोईवाला के झबरावाला में हाथी का हमला, 55 वर्षीय ग्रामीण की मौत
- स्कूटी से घर लौट रहे ग्रामीण पर हाथी ने किया हमला, उपचार के दौरान मौत
- हाथियों की बढ़ती आवाजाही से परेशान ग्रामीण, वन विभाग से सुरक्षा की मांग
- झबरावाला में हाथी के हमले से मौत के बाद ग्रामीणों में गुस्सा, मुआवजे की मांग
देहरादून। डोईवाला के कांसरो वन रेंज के अंतर्गत आने वाले झबरावाला गांव में हाथी के हमले से एक ग्रामीण की मौत हो गई। घटना शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। मृतक की पहचान 55 वर्षीय जमील पुत्र असगर अली के रूप में हुई है। घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वहीं, ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति आक्रोश भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से हाथियों की आवाजाही बढ़ रही है और हाथी सुरक्षा दीवार को पार कर अथवा उसे तोड़कर खेतों और आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हैं। इससे ग्रामीणों को लगातार जान-माल के नुकसान का खतरा बना हुआ है।
स्कूटी से घर लौट रहे थे जमील
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात जमील अपने साथी नफीस के साथ स्कूटी से घर लौट रहे थे। दोनों जब गांव के खेतों के पास हाथीकुंड क्षेत्र में पहुंचे, तभी अचानक उनके सामने एक हाथी आ गया। हाथी को सामने देखकर दोनों घबरा गए और वहां से भागने का प्रयास करने लगे। इसी दौरान हाथी ने जमील को अपनी चपेट में ले लिया। बताया गया कि हाथी ने जमील को उठाकर जमीन पर पटक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
ग्रामीणों की मदद से अस्पताल पहुंचाया
घटना के दौरान स्कूटी चला रहे नफीस ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाया। आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल जमील को उपचार के लिए हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट ले जाया गया। जमील की हालत गंभीर थी। अस्पताल में उनका उपचार शुरू किया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद कांसरो वन रेंज के अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी ली।
हाथियों की बढ़ती आवाजाही से ग्रामीण चिंतित
जमील की मौत के बाद क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि झबरावाला और आसपास के क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक हाथी सुरक्षा दीवार को कभी कूदकर तो कभी उसे तोड़कर खेतों और आबादी वाले हिस्सों में प्रवेश कर जाते हैं। हाथियों के आबादी क्षेत्र में पहुंचने के कारण ग्रामीणों को न केवल फसलों के नुकसान बल्कि अपनी और परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों में आने से रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि केवल घटना के बाद मौके पर पहुंचना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।
गांव में शोक के साथ आक्रोश
जमील की मौत से झबरावाला गांव में शोक का माहौल है। परिवार के सदस्य और ग्रामीण घटना से बेहद दुखी हैं। वहीं, घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है तो वन विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
खेती और मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करते थे जमील
ग्राम प्रधान परमिंदर सिंह के अनुसार, जमील करीब 55 वर्ष के थे। वह खेती-किसानी के साथ मजदूरी का काम भी करते थे और अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। ग्राम प्रधान ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि क्षेत्र में हाथियों की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रभावित परिवार की मदद के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी
घटना के बाद मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया होगी। घटना की सूचना मिलने पर कांसरो वन रेंज के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। वन विभाग की ओर से घटनाक्रम की जानकारी जुटाई गई है।
मुआवजे और सुरक्षा की मांग
ग्राम प्रधान परमिंदर सिंह ने वन विभाग से मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि जमील परिवार के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन थे और उनकी मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में हाथियों की आबादी वाले इलाकों में आवाजाही रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की उठाई मांग
झबरावाला में हुई इस घटना के बाद ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के आबादी क्षेत्र में प्रवेश की समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। सुरक्षा दीवार और अन्य व्यवस्थाओं के बावजूद यदि हाथी गांव और खेतों तक पहुंच रहे हैं तो इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता की समीक्षा जरूरी है। ग्रामीणों की मांग है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए और हाथियों की आवाजाही वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान जरूरी है, जिससे भविष्य में किसी और ग्रामीण की जान खतरे में न पड़े। जमील की मौत ने झबरावाला और आसपास के गांवों में मानव-हाथी संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब ग्रामीण वन विभाग से सुरक्षा और मुआवजे को लेकर प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।





