
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के सर्वर पर 21 अगस्त की रात संदिग्ध साइबर गतिविधि सामने आई, जिसके बाद आईटीडीए की जांच में अनधिकृत रिमोट एक्सेस के जरिये सेंध लगाने की कोशिश की पुष्टि हुई। जांच के अनुसार हमलावर ने कई गलत पासवर्ड डालकर खातों में प्रवेश का प्रयास किया और बाद में वेब सर्वर में लॉगिन कर नेटवर्क की रेकी तथा स्थानीय पासवर्ड और क्रेडेंशियल हासिल करने की कोशिश की, जिसे सुरक्षा सॉफ्टवेयर ने रोक दिया। आईटीडीए ने सभी पासवर्ड बदलने, प्रभावित कंप्यूटरों को फॉर्मेट करने, अनधिकृत रिमोट सॉफ्टवेयर हटाने और विस्तृत फॉरेंसिक जांच कराने की सिफारिश की है।
- उत्तराखंड स्वास्थ्य प्राधिकरण के सर्वर को बनाया निशाना, साइबर हमले की कोशिश
- रात में सर्वर पर हुई संदिग्ध गतिविधि, सुरक्षा प्रणाली ने नाकाम किया हमला
- दो खाते लॉक होने के बाद सर्वर में घुसा हमलावर, क्रेडेंशियल चोरी की कोशिश
- आईटीडीए की जांच में साइबर सेंध का खुलासा, सभी पासवर्ड बदलने के निर्देश
देहरादून। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के सर्वर पर 21 अगस्त की रात साइबर सेंध लगाने की कोशिश का मामला सामने आया है। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) की जांच रिपोर्ट में सर्वर पर संदिग्ध साइबर गतिविधि की पुष्टि हुई है। हालांकि समय रहते सुरक्षा प्रणाली सक्रिय हो गई और बड़ी घटना होने से पहले ही हमले की कोशिश को रोक दिया गया। आईटीडीए ने अब राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को पत्र भेजकर साइबर सुरक्षा के इंतजाम तत्काल मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सभी खातों के पासवर्ड बदलने, सर्वर तक पहुंच रखने वाले प्रभावित कंप्यूटरों को नेटवर्क से अलग कर फॉर्मेट करने और अनधिकृत रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर हटाने को कहा गया है।
21 अगस्त की रात सामने आई संदिग्ध गतिविधि
आईटीडीए की प्रारंभिक तकनीकी जांच के अनुसार घटना 21 अगस्त की रात करीब 10:13 बजे से 10:54 बजे के बीच हुई। उस समय कार्यालय बंद था और कोई कर्मचारी वहां मौजूद नहीं था। सीसीटीवी फुटेज की जांच में भी इस अवधि में कार्यालय में किसी कर्मचारी की मौजूदगी नहीं मिली। इसके बाद जांच में यह संभावना सामने आई कि सर्वर को बाहर से अनधिकृत तरीके से रिमोट एक्सेस के जरिये निशाना बनाया गया। आईटीडीए के अपर निदेशक तीर्थ पाल सिंह ने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अपर निदेशक को पत्र भेजकर तत्काल साइबर सुरक्षा के सख्त उपाय करने के निर्देश दिए हैं।
कई गलत पासवर्ड डालकर खातों में घुसने की कोशिश
लॉग्स की जांच में सामने आया कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने सबसे पहले कई गलत पासवर्ड डालकर खातों में प्रवेश करने की कोशिश की। लगातार गलत प्रयासों के कारण दो खाते लॉक हो गए। इसके कुछ ही समय बाद हमलावर स्वास्थ्य प्राधिकरण के वेब सर्वर पर लॉगिन करने में सफल रहा। सर्वर में प्रवेश के बाद सिस्टम में नेटवर्क की जानकारी हासिल करने के लिए आईपी स्कैनिंग की कोशिश की गई।
नेटवर्क की रेकी के बाद क्रेडेंशियल चोरी का प्रयास
जांच के अनुसार सर्वर में प्रवेश करने के बाद हमलावर ने नेटवर्क की रेकी के लिए एडवांस्ड आईपी स्कैनर चलाया। इसके बाद स्थानीय पासवर्ड और क्रेडेंशियल हासिल करने के उद्देश्य से रजिस्ट्री फाइल डाउनलोड करने की कोशिश की गई। हालांकि सर्वर पर तैनात डीप सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर ने इस कमांड को बीच में ही रोक दिया। सुरक्षा प्रणाली के सक्रिय होने से संदिग्ध गतिविधि को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला और सिस्टम को सुरक्षित कर लिया गया।
समय रहते रोका गया हमला
आईटीडीए की रिपोर्ट के अनुसार साइबर हमले की कोशिश को समय रहते रोक लिया गया। इसके कारण उपलब्ध जानकारी के मुताबिक किसी फाइल की चोरी नहीं हुई और सर्वर के सामान्य संचालन पर भी असर नहीं पड़ा। यानी हमलावर ने सर्वर तक पहुंच बनाने और संवेदनशील क्रेडेंशियल हासिल करने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा प्रणाली ने संदिग्ध कमांड को रोक दिया। इसके बावजूद घटना ने स्वास्थ्य प्राधिकरण के सर्वर और उससे जुड़े सिस्टम की साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाहरी हैकर या थर्ड पार्टी यूजर की आशंका
आईटीडीए ने इस गतिविधि के पीछे किसी बाहरी हैकर, डेवलपर या थर्ड पार्टी यूजर की संभावना से इनकार नहीं किया है। हालांकि, उपलब्ध जांच के आधार पर अभी हमले के वास्तविक स्रोत की पहचान नहीं हुई है। मामले की पूरी तह तक पहुंचने और यह पता लगाने के लिए कि सर्वर तक अनधिकृत पहुंच किस माध्यम से बनाई गई तथा इसके पीछे कौन था, विस्तृत फॉरेंसिक जांच कराने की सिफारिश की गई है।
सर्वर एक्सेस वाले कंप्यूटरों को फॉर्मेट करने के निर्देश
आईटीडीए ने स्वास्थ्य प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि जिन कंप्यूटरों को स्टेट डाटा सेंटर के सर्वर तक पहुंच की अनुमति है, उन्हें तत्काल नेटवर्क से अलग किया जाए और फॉर्मेट किया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन सिस्टम से सर्वर तक पहुंच बनाई जा सकती है, उनमें किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि या अनधिकृत सॉफ्टवेयर मौजूद न रहे।
सभी पासवर्ड बदलने होंगे
साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए प्राधिकरण के सभी खातों के पासवर्ड तत्काल बदलने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कम से कम 12 अंकों के जटिल पासवर्ड इस्तेमाल करने को अनिवार्य करने की बात कही गई है। पासवर्ड बदलने के निर्देश का उद्देश्य पुराने क्रेडेंशियल के जरिये किसी संभावित अनधिकृत पहुंच की संभावना को खत्म करना है।
एनीडेस्क और टीमव्यूअर जैसे सॉफ्टवेयर हटाने को कहा
आईटीडीए ने सिस्टम से एनीडेस्क, टीमव्यूअर जैसे अनधिकृत रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए हैं। रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिये किसी सिस्टम तक दूर से पहुंच बनाई जा सकती है। इसलिए ऐसे सॉफ्टवेयर के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकने के लिए इन्हें हटाने और केवल अधिकृत माध्यमों से ही रिमोट एक्सेस की अनुमति देने पर जोर दिया गया है।
कार्यालय समय के बाद इंटरनेट इस्तेमाल पर भी रोक
आईटीडीए ने ऑफ-आवर्स में इंटरनेट के अनधिकृत इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य कार्यालय बंद रहने के दौरान सिस्टम और नेटवर्क पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की संभावना को कम करना है। 21 अगस्त की घटना भी रात के समय हुई थी। सीसीटीवी जांच में उस दौरान कार्यालय में कर्मचारियों की मौजूदगी नहीं मिली थी। ऐसे में ऑफ-आवर्स नेटवर्क सुरक्षा को लेकर दिए गए निर्देश महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
फिलहाल डाटा सुरक्षित होने की रिपोर्ट
आईटीडीए की जांच के मुताबिक हमले की कोशिश समय रहते रोक दी गई, इसलिए फिलहाल किसी फाइल की चोरी या सर्वर के संचालन पर असर पड़ने की बात सामने नहीं आई है। हालांकि, साइबर सुरक्षा के मामलों में किसी घटना के वास्तविक प्रभाव का पता लगाने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होती है। इसी वजह से आईटीडीए ने फॉरेंसिक जांच कराने की सिफारिश की है, जिससे हमले के स्रोत और उसकी पूरी गतिविधि का पता लगाया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
घटना के बाद राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के सर्वर और उससे जुड़े कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पासवर्ड बदलने से लेकर प्रभावित कंप्यूटरों को फॉर्मेट करने और अनधिकृत रिमोट सॉफ्टवेयर हटाने तक कई कदम तत्काल उठाने को कहा गया है। अब विस्तृत फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सर्वर तक अनधिकृत पहुंच किस माध्यम से बनाई गई थी और संदिग्ध गतिविधि के पीछे कौन था। फिलहाल उपलब्ध जांच रिपोर्ट में साइबर सेंध की कोशिश की बात सामने आई है, जबकि डाटा चोरी की पुष्टि नहीं हुई है।





