यह वंदना भगवान गणपति को विघ्न विनाशक, सुखदाता और दुःखहर्ता के रूप में समर्पित है। रचना में गणेश जी से भक्तों की लाज रखने, सभी कार्य सफल करने, विघ्न हरने और सद्बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और ज्ञान के देवता गणपति के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आराधना का भाव पूरे भजन में व्यक्त हुआ है।
- गणपति महाराज की वंदना
- विघ्न हर लो हे गजानन
- सदा रखना प्रभु लाज हमारी
- जय जय हे गणपति महाराज
भुवन बिष्ट
मौना, रानीखेत (उत्तराखंड)
जय जय हे गणपति महाराज,
सदा रखना प्रभु लाज हमारी।
हे विघ्न विनाशक जय लंबोदर,
प्रभु आए हैं हम शरण तुम्हारी।
रिद्धि-सिद्धि संग सदा विराजे,
वंदन करूँ सदा मैं जय जयकार।
सफल करो हर काज प्रभु तुम,
हर भक्त कर रहा है यही पुकार।
प्रथम पूजते देव गणपति सदा,
जय प्रभु जगत के पालनहार।
विघ्न हरो हर पथ से प्रभु तुम,
आए भक्त शरण तुम्हारे द्वार।
लड्डूवन का सदा भोग लगाएँ,
जय जय प्रभु गजमुखधारी।
जय जय हे गणपति महाराज,
सदा रखना प्रभु लाज हमारी।
हे विघ्न विनाशक जय लंबोदर,
प्रभु आए हैं हम शरण तुम्हारी….
माता गौरी प्रभु शंकर के लाला,
गणपति करते दुष्टों का संहार।
सच्चे मन से जो शरण है आता,
प्रभु गणेश भरते हैं सदा भंडार।
शुभ काम से पहले नाम गजानन,
विघ्न हरते सुफल करते हैं काज।
ज्ञान का प्रभु दीप जलाओ,
हम विनती चरणों में करते आज।
सुर, नर, मुनिजन ज्ञानी पूजे,
करते हैं गणपति मूषक सवारी।
जय जय हे गणपति महाराज,
सदा रखना प्रभु लाज हमारी।
हे विघ्न विनाशक जय लंबोदर,
प्रभु आए हैं हम शरण तुम्हारी….
एकदंत प्रभु दया के सागर,
हर भक्त का करते बेड़ा पार।
साहस हर पथ पर मिल जाता,
विघ्न हरते गजानन करते उद्धार।
कृपा बरसाओ जय जय विनायक,
सद्बुद्धि का प्रभु सदा भरना भंडार।
शुभ-लाभ विराजे संग तुम्हारे,
प्रभु गणपति हर घर-घर में पधारो।
बिगड़ी बना दो विपदा हर लो,
अर्पण यह जीवन प्रभु इसे सँवारो।
करूँ चरण वंदना शीश झुकाऊँ,
सदा आरती गायें जग के नर-नारी।
सुखदाता प्रभु तुम हो दुःखहर्ता,
जय गणेश एकदंत चार भुजा धारी।
जय जय हे गणपति महाराज,
सदा रखना प्रभु तुम लाज हमारी।
हे विघ्न विनाशक जय लंबोदर,
प्रभु आए हैं हम सब शरण तुम्हारी।



