जल है तो कल है

विश्व जल दिवस के अवसर पर प्रस्तुत एक आलेख...

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सुनील कुमार

प्रकृति के पांच मूल तत्वों में जल का अपना अहम स्थान है। कहा भी गया है जल ही जीवन है। क्योंकि जल के बिना कोई भी जीव ज्यादा दिनों तक जीवित नहीं रह सकता। जीव शरीर का लगभग सत्तर फीसदी भाग जल ही होता है‌। हमारी जैविक क्रियाएं जल के बिना संपादित ही नहीं हो सकती। किसी भी प्राणी को जीवित रहने के लिए हवा के बाद जो दूसरा महत्वपूर्ण तत्व है वह जल ही है।

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार बिना जल के मनुष्य ज्यादा से ज्यादा तीन से पांच दिन ही जीवित रह सकता है। जैविक क्रियाओं के परिणाम स्वरूप हमारे शरीर में अनेकों विषैले पदार्थों जैसे मल- मूत्र, पसीना आदि का उत्पादन होता रहता है। इन हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में जल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

शरीर के विभिन्न अंगों में मौजूद जहरीले तत्व जल में घुल कर पेशाब के जरिए बाहर निकल आते हैं।यदि शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा न पहुंचे तो ये हानिकारक तत्व शरीर में जमा होते रहते हैं और एक-एक करके अंगों के कार्य को बाधित कर उन्हें बीमार कर देते हैं। इतना ही नहीं पानी शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है।यह मनुष्य व अन्य सभी प्राणियों को चुस्त-दुरुस्त रखता है।

शरीर की थकान को मिटाता है।शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है जिससे रोग दूर होते हैं।भारत जैसे गर्म देशों में एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना कम से कम तीन लीटर पानी अवश्य पीना चाहिए। जिससे कि शारीरिक गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें।शरीर में पानी की कमी होने पर भूख न लगना, थकान महसूस होना,मूत्र ज्यादा पीला आना और बदबूदार होना, प्यास लगना, अपच होना, मांसपेशियों में दर्द होना, मोटापा होना, कुछ अच्छा न लगना आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से जल एक रासायनिक पदार्थ है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों से मिलकर बना है। सामान्य रूप में जल पूरी तरह से तरल रंगहीन एवं स्वादहीन पदार्थ है। धरती पर एकमात्र जल ही ऐसा पदार्थ है जो द्रव, ठोस और गैस तीनों रूपों में पाया जाता है वह भी प्राकृतिक रूप से। ऐसा कोई दूसरा पदार्थ नहीं है‌‌।धरती पर प्रचुर मात्रा में जल विद्यमान होने के बावजूद भी पीने योग्य जल की मात्रा मात्र तीन प्रतिशत ही है,शेष जल सागरों और महासागरों में अपेय जल के रूप में मौजूद है।

जीव धारियों के जीवन के लिए इतना महत्वपूर्ण होने के बावजूद भी लोग पेयजल के सदुपयोग के प्रति उदासीन हैं। अपनी उदासीनता के चलते लोग रोजाना हजारों लाखों लीटर पानी बर्बाद करते हैं। नहाने के लिए सावर व बाथटप का उपयोग, ब्रश करते समय नल को खुला छोड़ना, मोटर गाड़ियों को धोने के लिए स्वच्छ पेयजल का उपयोग करना आदि तरीकों से हम प्रतिदिन पेयजल का दुरुपयोग करते हैं।

जल स्रोतों के अत्यधिक दोहन व जल के अविवेक पूर्ण उपयोग के कारण पेय जल की मात्रा दिनों दिन घटती जा रही है और जल संकट की समस्या बढ़ती जा रही है।वर्तमान जल संकट को देखते हुए हम सभी का नैतिक दायित्व बनता है कि जाने-अनजाने अपने आस-पास हो रही पानी की बर्बादी को रोकने के लिए हम अपने स्तर से प्रयास करें। यदि समय रहते हम न चेते तो निकट भविष्य में इस धरा से अपने अस्तित्व को मिटाने के जिम्मेदार हम ही आप होंगे और कोई दूसरा नहीं।

जल संरक्षण का अर्थ जल की बर्बादी को रोकने से है।जल संरक्षण वर्तमान समय की एक अनिवार्य आवश्यकता है। क्योंकि वर्षा जल हर समय उपलब्ध नहीं रहता अतः पानी की कमी को पूरा करने के लिए जल का संरक्षण आवश्यक है। आइए कुछ घरेलू उपायों पर चर्चा करते हैं जिन्हें अपनाकर हम जल संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं-

  • नहाने के लिए हमेशा बाल्टी और मग का उपयोग करें।बाथटब का उपयोग कभी न करें। क्योंकि इसके प्रयोग से बहुत अधिक मात्रा में जल का दुरुपयोग होता है।
  • ब्रश करते समय या दाढ़ी बनाते समय नल को खुला न छोड़े। आवश्यकतानुसार ही नल का प्रयोग करें।
  • घर की फर्श व मोटर गाड़ियों को धोने के लिए स्वच्छ जल का प्रयोग करने के बजाए आर.ओ. ( वाटर फिल्टर) या वाशिंग मशीन से निकले जल का प्रयोग करें।
  • कपड़े धोने के लिए हमेशा वाशिंग मशीन का प्रयोग न करें। जब अधिक कपड़े धुलने हों तभी वाशिंग मशीन का प्रयोग करें अन्यथा थोड़े कपड़े हाथ से ही धुलें। इससे काफी मात्रा में पानी की बचत होगी।
  • शौचालयों में दो तरह के फ्लैश का प्रयोग करें। मूत्र त्याग के बाद कम पानी वाले और मल त्याग के बाद अधिक पानी वाले फ्लैश का प्रयोग करें।
  • कूलर और एसी से निकलने वाले पानी का प्रयोग फूल-पौधों की सिंचाई में करें।
  • बर्तन धुलने के लिए सीधे नल का प्रयोग न करें।बल्कि बाल्टी या टब में पानी भरकर उपयोग करें।
  • फल,अनाज या सब्जियों को सीधे नल से धोने के बजाय बाल्टी या टब में पानी भरकर धुलें।
  • बरसात के दिनों में छत पर जमा होने वाले पानी को पाइप लाइन के माध्यम से वाटर टैंक या जमीन में संरक्षित करने की उचित व्यवस्था करें ।
  • समय-समय पर परिवार के सदस्यों से जल की महत्ता पर चर्चा अवश्य करें।

उपरोक्त उपायों को अपने दैनिक जीवन में अपनाकर हम जल संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं। बस जरूरत है एक सकारात्मक पहल की।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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सुनील कुमार

लेखक एवं कवि

Address »
ग्राम : फुटहा कुआं, निकट पुलिस लाइन, जिला : बहराइच, उत्तर प्रदेश | मो : 6388172360

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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