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कैसे हैं आप… इसी प्रकार चेतन चौहान कहते हैं कि आपके विचार बहुत अच्छे लगते हैं जो का काबिले तारीफ है। एक आप ही तो हैं जो खरी – खरी बातें लिख सकते हैं। मंगल कुमार जैन कहते है कि सांची कहीं, खरी – खरी कहीं। कनाडा से अंजू माथुर लिखती है बहुत ही सुन्दर, अनुकरणीय आलेख। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)
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कैसे हैं आप । यह शब्द भले ही छोटे हैं लेकिन इनका मतलब बहुत ही बड़ा है। जब हम किसी को फोन करके पूछते हैं कि भाई कैसे हो तो सामने वालें का उत्साह बढ जाता है कि कोई तो हैं जो हमें समय समय पर याद करके हमारे हालचाल पूछता हैं। हमारे अपने वहीं है जिनका स्मरण करने मात्र से ही दुःख आधा हो जाता है और खुशी दुगुनी हो जाती हैं वरना इस मतलब की दुनियां में कौन अपना हैं।
कैसे है आप कहते ही सामने वाले के मन में एक नई सोच, ऊर्जा व शक्ति का संचार हो जाता हैं। अगर हम किसी को कुछ दे नहीं सकते हैं, तो इतना तो पूछ ही सकते हैं। ये ही तो वे शब्द है जो एक – दूसरे के बीच की दूरियां कम करके उन्हें प्रसन्नता के साथ पास में लाते हैं। उनमें प्रेम स्नेह और मिलनसारिता का संचार करते हैं और आपस में सकारात्मक सोच विकसित करते हैं।
अरे, मेरे भाई ! यह प्रेम और स्नेह ही तो हैं जो हमें एक-दूसरे से बांधे हुए है और हमारे संबंधों को मजबूत बनाये हुए हैं, वरना कौन हैं जो किसके दुःख दर्द सुनें। एक आप ही तो हैं हमारे इसलिए आपकों याद कर लिया। हमारे एक साथी महेश जी हमारी रचनाएं पढ़कर प्रायः टिप्पणी करते हैं। वाह – वाह, बहुत खूब, बहुत खरी – खरी लिखी, जैसे शब्दों से हमारा मनोबल बढाते रहते हैं।
इसी प्रकार चेतन चौहान कहते हैं कि आपके विचार बहुत अच्छे लगते हैं जो का काबिले तारीफ है। एक आप ही तो हैं जो खरी – खरी बातें लिख सकते हैं। मंगल कुमार जैन कहते है कि सांची कहीं, खरी – खरी कहीं। कनाडा से अंजू माथुर लिखती है बहुत ही सुन्दर, अनुकरणीय आलेख। तारीफ के लिए कोई शब्द नहीं। चांद मोहम्मद घोसी कहते हैं कि अति सुन्दर, हार्दिक बधाई, अच्छी कहानी के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
कहने का तात्पर्य यह है कि इस मोबाइल युग में दिन – रात मोबाइल से न चिपके रहे अपितु कभी कभी फोन पर भी अपने साथियों, रिश्तेदारों को याद कर उन से बातचीत करते रहिए और अपने संबंधों को मजबूत बनाये रखिए। विचारों का आदान-प्रदान कीजिए और अपने विचारों को जन – जन तक फैलाये और सम्पर्क बढाइये।








