- पांच दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला में 45 बच्चों ने लिया भाग
- बाल कवि सम्मेलन और नुक्कड़ नाटक ने बांधा समां
- बच्चों को अच्छा इंसान बनाने और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने पर जोर
- पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने बताया पेड़ों का महत्व
सुनील कुमार माथुर
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार, जोधपुर, राजस्थान
अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका बाल प्रहरी, भारत ज्ञान विज्ञान समिति तथा देहरादून किताब कौतिक आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में दून लाइब्रेरी, देहरादून में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित बच्चों की पांच दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला के समापन समारोह में 45 बच्चों द्वारा तैयार हस्तलिखित पुस्तकों की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
बच्चों ने मेरा परिचय, जीवन की घटना, यात्रा वर्णन, मेरी दिनचर्या, हमारा देहरादून, चुटकुले आदि 15 पृष्ठों को जोड़ते हुए बाल प्रहरी, बाल ज्ञान, बालवाटिका, बाल मन, बालिका स्वर, नई ज्योति, नई किरण, संभावना, बाल उमंग, अभिव्यक्ति, अभिलाषा आदि नामों से अपनी-अपनी हस्तलिखित पुस्तक तैयार की।
बाल कवि सम्मेलन
बाल कवि सम्मेलन में 12 बच्चों ने देहरादून किताब कौतिक, बादल, फूल, भोजन की बर्बादी, मोबाइल के नुकसान आदि विषयों पर कार्यशाला में तैयार स्वरचित कविताओं का पाठ किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजपुर रोड की कक्षा 7 की छात्रा नसरा प्रवीन तथा संचालन सनातन धर्म इंटर कॉलेज के कक्षा 8 के छात्र वीरेंद्र ने किया।
नुक्कड़ नाटक
उदय किरौला द्वारा निर्देशित नुक्कड़ नाटक मोबाइल टन टना टन टन के माध्यम से बच्चों ने वर्तमान मोबाइल संस्कृति पर प्रहार करते हुए आज की हकीकत को प्रस्तुत किया।
बाल पत्रिका का लोकार्पण
प्रारंभ में कार्यशाला के प्रत्येक प्रतिभागी बच्चे को अतिथियों ने बैज लगाकर सम्मानित किया। ओरिगामी के तहत बच्चों ने अखबार से बनाए मुकुट अतिथियों को पहनाए। प्रकाशचंद्र पांडेय द्वारा संपादित दीवार पत्रिका बाल अभिव्यक्ति का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया।
पुस्तकों की प्रदर्शनी
किताब कौतिक आयोजक मंडल से जुड़े क्रिएटिव उत्तराखंड के सचिव दया पांडेय ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 23, 24 तथा 25 अक्टूबर को देहरादून किताब कौतिक में जहां देश-विदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की पुस्तकें विभिन्न स्टालों में होंगी, वहीं बाल लेखन कार्यशाला में देहरादून के विभिन्न स्कूलों के बच्चों की हस्तलिखित पुस्तकों की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।
45 बच्चों की भागीदारी
कार्यशाला में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजपुर रोड, सीएनआई गर्ल्स इंटर कॉलेज, सनातन धर्म इंटर कॉलेज तथा राजकीय जूनियर हाईस्कूल, परेड ग्राउंड के 45 बच्चों ने भागीदारी की। समापन समारोह की अध्यक्षता भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष विजय भट्ट ने की। समूचे समारोह का संचालन कक्षा 8 की छात्रा काव्या ने किया।
पेड़ हमारे मित्र हैं
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने बच्चों को मैती आंदोलन की पृष्ठभूमि बताई। उन्होंने कहा कि पेड़ हमारे मित्र होते हैं। हम सबको पेड़ लगाने व पेड़ बचाने की योजना बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गैर-शैक्षणिक गतिविधियों से भी बच्चे काफी कुछ सीखते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को निखारने व उन्हें अभिव्यक्ति का अवसर देने के लिए ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन समय की मांग है।
बच्चे एक अच्छे इंसान बनें
उन्होंने कहा कि आज अभिभावक बच्चों को डॉक्टर व इंजीनियर आदि बड़े पदों पर आसीन होने का सपना देखते हैं। समय को देखते हुए यह जरूरी है। परंतु आज जरूरत है कि बच्चे एक अच्छे इंसान बनें। इसके लिए प्रयास किए जाने की जरूरत है।
बच्चों को सामाजिक सरोकार से जोड़ने की जरूरत
कार्यक्रम के अध्यक्ष भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष विजय भट्ट ने कहा कि बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़कर अच्छे अंकों से उत्तीर्ण तो हो सकते हैं, परंतु बच्चों में मानवीय संवेदना व सामाजिक सरोकारों से जुड़े होने की भावना विकसित करने की जरूरत है। प्रारंभ में कार्यशाला के संयोजक प्रकाश पांडे ने सभी का स्वागत किया।
बाल प्रहरी के संपादक उदय किरौला ने कहानी के माध्यम से बच्चों को नशे की प्रवृत्ति से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। बच्चों के दो समूहों ने गिरीश तिवारी गिर्दा के गीतों का गायन किया। इस अवसर पर भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय महासचिव कमलेश खंतवाल, मनोज पांडे, अदिति जमलोकी, डॉ. शशिकला, सुनीता गुसाईं, पूजा जोशी, कु. उमा वर्तवाल, प्रवीण कुमार भट्ट भी उपस्थित थे। प्रातःकालीन सत्र में पत्रकार उदय किरौला ने अखबार के मोड़ से ओरिगामी विधा के माध्यम से बच्चों को सरल भाषा में रेखागणित को समझाया।
बाल प्रहरी पत्रिका के संपादक उदय किरौला हर दिन बच्चों के लिए कुछ नया करते ही रहते हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जो कार्य शिक्षण संस्थानों व बच्चों के अभिभावकों का है, वह कार्य उदय किरौला कर रहे हैं और समाज को एक नई सोच, नई दशा व दिशा प्रदान कर रहे हैं। यही वजह है कि आज बाल प्रहरी व बाल साहित्य संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रमों से लाखों बच्चे जुड़े हुए हैं और मंच का न केवल संचालन कर रहे हैं, अपितु मुख्य अतिथि बनकर भी अपनी सहभागिता निभा रहे हैं, जो एक सराहनीय कदम है।
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