
पौड़ी गढ़वाल निवासी व्यक्ति ने अपनी बहन की मृत्यु के बाद उसके पति पर एचआईवी संक्रमण की जानकारी छिपाने और फर्जी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अस्पताल रिकॉर्ड में कथित तौर पर रिपोर्ट से जुड़े कई विसंगतियां सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया है।
- बहन की मौत के बाद भाई ने जीजा पर लगाए गंभीर आरोप
- एचआईवी जांच से बचता रहा पति, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
- अस्पताल रिकॉर्ड से खुली कथित फर्जी रिपोर्ट की परत
- संक्रमण छिपाने और दस्तावेज फर्जीवाड़े की जांच शुरू
देहरादून। पौड़ी गढ़वाल की एक विवाहिता की मृत्यु के बाद उसके पति पर एचआईवी संक्रमण की जानकारी छिपाने और कथित रूप से फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने का गंभीर आरोप लगा है। मृतका के भाई की शिकायत पर प्रेमनगर थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि पति ने न केवल अपनी स्वास्थ्य स्थिति को छिपाया बल्कि जांच कराने से भी लगातार बचता रहा, जिससे उपचार के दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार माजरी माफी निवासी शिकायतकर्ता की बहन को 14 फरवरी 2026 को गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय जांच के दौरान महिला एचआईवी संक्रमित पाई गई। डॉक्टरों ने संक्रमण के स्रोत और परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला के पति और पुत्र की भी जांच कराने की सलाह दी थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉक्टरों की सलाह के बावजूद पति अस्पताल से चला गया और उसने तत्काल कोई जांच नहीं कराई। परिजनों के अनुसार बाद में उसने व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी एचआईवी जांच रिपोर्ट भेजी और दावा किया कि यह रिपोर्ट ग्राफिक एरा अस्पताल, धूलकोट से जारी की गई है। हालांकि मृतका के परिजनों को रिपोर्ट पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल प्रशासन से संपर्क कर उसकी सत्यता की जांच कराई।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल से प्राप्त जानकारी में पता चला कि रिपोर्ट पर अंकित यूएचआईडी नंबर किसी अन्य महिला मरीज का था। साथ ही अस्पताल के रिकॉर्ड में संबंधित व्यक्ति के नाम से कोई एचआईवी जांच दर्ज नहीं मिली। इस खुलासे के बाद रिपोर्ट के फर्जी होने की आशंका और गहरा गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि रिपोर्ट वास्तविक होती तो अस्पताल के रिकॉर्ड में उसका विवरण अवश्य उपलब्ध होता।
तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में इन्द्रेश अस्पताल में दोबारा जांच कराने का सुझाव दिए जाने पर भी आरोपी ने जांच कराने से इनकार कर दिया। इससे परिजनों के संदेह और बढ़ गए। उनका आरोप है कि पति लगातार अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी देने से बचता रहा और चिकित्सकीय जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया।
उपचार के दौरान विवाहिता की तबीयत में सुधार नहीं हो सका और 2 मार्च 2026 को उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद परिजनों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी एकत्र कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पति ने अपनी बीमारी को जानबूझकर छिपाया, कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया तथा मृतका की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाया।
प्रेमनगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अस्पताल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्टों और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि प्रस्तुत की गई रिपोर्ट वास्तविक थी या उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ अथवा फर्जीवाड़ा किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले ने स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छिपाने, चिकित्सकीय दस्तावेजों की प्रामाणिकता और वैवाहिक संबंधों में पारदर्शिता जैसे गंभीर मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब पूरे प्रकरण की सच्चाई पुलिस जांच और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।








