
उत्तराखंड सरकार की देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत पिथौरागढ़ में तीन दिवसीय आवासीय उद्यमिता बूट कैंप का शुभारंभ हुआ। विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों के 50 चयनित छात्र-छात्राओं को स्टार्टअप, वित्तीय प्रबंधन, बिजनेस मॉडल और उद्यमिता कौशल का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए रोजगार सृजन की दिशा में प्रेरित करना है।
- देवभूमि उद्यमिता योजना से युवाओं को मिलेगा स्टार्टअप प्रशिक्षण
- पिथौरागढ़ में तीन दिवसीय उद्यमिता बूट कैंप शुरू
- 50 विद्यार्थियों को मिलेगा व्यवसायिक कौशल का प्रशिक्षण
- स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यम विकसित करने पर जोर
पिथौरागढ़ | उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी देवभूमि उद्यमिता योजना (DUY) के अंतर्गत पिथौरागढ़ के ईटीसी थरकोट में तीन दिवसीय आवासीय उद्यमिता बूट कैंप का उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ। भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं में उद्यमशीलता की भावना विकसित करना तथा उन्हें आधुनिक व्यवसाय और स्टार्टअप की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है।
इस बूट कैंप में राजकीय महाविद्यालय गंगोलीहाट, राजकीय महाविद्यालय बलुआकोट, राजकीय महाविद्यालय मुवानी, एसएनएस राजकीय परास्नातक महाविद्यालय तथा एलएसएम कैंपस पिथौरागढ़ के 50 चयनित छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। प्रशिक्षण शिविर के दौरान प्रतिभागियों को व्यवसाय शुरू करने और सफलतापूर्वक संचालित करने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
तीन दिवसीय आवासीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में उद्यमशीलता कौशल का विकास करना, उन्हें व्यवसायिक अवसरों की पहचान कराना तथा स्टार्टअप की स्थापना, वित्तीय प्रबंधन, विपणन रणनीति और व्यवसाय विस्तार की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को डिज़ाइन थिंकिंग, बिजनेस आइडिया डेवलपमेंट, मार्केट एनालिसिस, फाइनेंस एंड फंड्स, विभिन्न सरकारी योजनाओं, पिचिंग स्किल्स और गो-टू-मार्केट रणनीतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया जाएगा।
कार्यक्रम में उपस्थित ईडीआईआई के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और क्षेत्रीय उत्पादों पर आधारित नवाचारपूर्ण उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधन, कृषि, पर्यटन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद युवाओं के लिए सफल स्टार्टअप की अपार संभावनाएं प्रदान करते हैं। यदि आधुनिक तकनीक और नवाचार को स्थानीय संसाधनों के साथ जोड़ा जाए तो प्रदेश में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
प्रतिभागियों ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि यह बूट कैंप उन्हें उद्यमिता की व्यावहारिक समझ विकसित करने के साथ-साथ अपने व्यवसायिक सपनों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेगा। उनका मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यवसायिक निर्णय लेने की योग्यता में भी वृद्धि होगी।
कार्यक्रम का संचालन ईडीआईआई के उद्यमिता विशेषज्ञ डॉ. रजत शर्मा के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान देवभूमि उद्यमिता योजना के टिहरी गढ़वाल के प्रोजेक्ट अधिकारी दिग्विजय सिंह तथा चमोली के प्रोजेक्ट अधिकारी विनोद नेगी ने प्रशिक्षण के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं ईडीआईआई की उद्यमिता विशेषज्ञ अश्विनी तिवारी ने विद्यार्थियों को उद्यमिता के विभिन्न आयामों, स्टार्टअप की चुनौतियों और सफल व्यवसाय स्थापित करने की रणनीतियों से अवगत कराया।
ईटीसी थरकोट, पिथौरागढ़ के ईटीओ पंकज पंत ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं और सभी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। आयोजकों ने बताया कि देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत आयोजित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को नौकरी की तलाश करने के बजाय स्वयं उद्यम स्थापित कर रोजगार सृजन करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका विश्वास है कि इस पहल से उत्तराखंड में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और प्रदेश का उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र अधिक सशक्त बन सकेगा।








